July 25, 2026

साहित्य

मनोज शाह ‘मानस’ की तीन ग़ज़लें

"कब तक इन बेड़ियों में..." सजती नहीं है दुल्हन अब डोलियों में । अब वो दम नहीं शिकारियों के गोलियों...