April 24, 2026

साहित्य

वे आज भी मौज़ूद हैं अपनी रचनाओं में

( आलेख : स्वराज करुण ) छत्तीसगढ़ के सामाजिक ,सांस्कृतिक साहित्यिक और राजनीतिक इतिहास पर लोग आज जो कुछ भी...

आप भी हुज़ूर औघड़ हो और मामूली औघड़ नहीं…

आप भी हुज़ूर औघड़ हो और मामूली औघड़ नहीं, पूरे सिद्ध औघड़। हम लोग गोरखपुर गए थे फिर वहाँ से...

अभिनय में मैं धर्मेंद्र का फ़ैन नहीं रहा…

उनसे दो बार मिलना हुआ। एक बार 1980 में जयपुर के क्लार्क्स आमेर होटल में, जब वे — हेमा मालिनी...

धर्मेन्द्र को याद करते हुए:

वे मेरे मिडिल स्कूल के प्यारे प्यारे दिन थे. जब फिल्मों के धर्मेन्द्र से अंजान था. तब तक शम्मीकपूर और...

शहीदी दिवस : गुरु तेग बहादुरजी को शत-शत नमन!!

कायदे से तो आज का दिन राष्ट्रीय शोक दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए। क्योंकि आज ही के दिन...

नई पीढ़ी से मेरी ये गुज़ारिश है

न महलों की बुलंदी से न लफ़्ज़ों के नगीने से। तमद्दुन में निखार आता है घीसू के पसीने से। कि...

मातृभाषा एक अनसुना रेडियो-स्टेशन है

मातृभाषा वह धूप है, जो घर की देहरी पर कभी नहीं पड़ती - क्योंकि वह स्वयं ही घर के भीतर...

श्रेष्ठता का उपनिवेश सबसे ख़तरनाक

कभी-कभी मुझे लगता है : महानता एक छोटा-सा महाद्वीप है—अभी-अभी खोजा गया, पर जिस पर झंडे बहुत पहले से गड़े...