“छत्तीसगढ़ की सरकार, खुमान-संगीत को उसी तरह से स्थापित करने की पहल करे जैसे कि बंगाल में रवींद्र-संगीत को स्थापित किया गया”
"खुमान-संगीत" यह शीर्षक ठीक वैसा ही है जैसे रवींद्र-संगीत। यह बात और है कि बंगाल ने रवींद्र-संगीत को मान्यता प्रदान...
"खुमान-संगीत" यह शीर्षक ठीक वैसा ही है जैसे रवींद्र-संगीत। यह बात और है कि बंगाल ने रवींद्र-संगीत को मान्यता प्रदान...
"मोर संग चलव........" (भाग - 1) इन तीन शब्दों के साथ ही कवि-गीतकार-गायक लक्ष्मण मस्तुरिया की साँवली-सलोनी सूरत आँखों के...
कविता रोज लिखते हैं मन में आए इतना लिखते हैं लेकिन क्या सच में हम कविता लिखते हैं। बहुत दिनों...
जीवन के सफर मे पक्के, चमचमाते रास्ते कम ही मिलते है ! अक्सर मिलती है अजनबी पगडंडियाँ उबड़- खाबड़ सी.....
मैं कुछ वर्षों तक सागर में था। वहां एक मिठाईवाला है। वैसी गुजिया बनानेवाला पूरे मुल्क में कहीं भी नहीं...
एक कवि की पंक्तियां हैं ,"नमन हैं उन्हें जो चले यात्रा पर लेकिन पहुंच कभी नहीं पाए/ प्रणाम है उन्हें...
ज़िन्दगी बेवफ़ा होगी, नया सफ़र शुरू होगा, मर के भी हमको कभी शिकवा ना होगा। इस जहां से ज़्यादा ख़ूबसूरत...
पिछले दसेक दिनों से हमारे इधर माटी के इन पुतरा पुतरी की धज सड़क किनारे देखता आ रहा हूँ। रंग...
वरिष्ठ लेखिका श्रीमती सुधा वर्मा लंबे समय से साहित्य से जुड़ी हुई हैं। उनका कार्य मुख्यतः छत्तीसगढ़ी साहित्य,लोक साहित्य एवं...
ये मालदीव के नजारे नहीं हैं यहाँ आप ऋषिकेश से सिर्फ 1.30 घंटे में पहुंच सकते हैं,ये टिहरी झील के...