October 22, 2026

साहित्य

मैं एक बूँद हासिल नहीं कर पाया

* विष्णु नागर ● ठीक-ठाक लेखक बनने का मतलब --------------------------------------------- "न मै अपने आपको इतनी अच्छी तरह जानता हूँ (आध्यात्मिक...

अबूझ पहेली को बूझता व्यंग्य उपन्यास

विश्वेन्द्र ठाकुर के उपन्यास ‘किस्सा बहराम चोट्टे का’ के बारे में सुना करते थे. हमारे पुरोधा साहित्यकार हरि ठाकुर ने...

“छत्तीसगढ़ में क्रांतिकारी परिवर्तन के वास्तविक सूत्रधार : दाऊ रामचंद्र देशमुख”

(आज जन्म-जयंती पर विशेष) किसी भी अंचल की पहचान वहाँ की संस्कृति, परम्परा, जीवन-शैली और वहाँ का साहित्य होता है।...

आज जयंती म विशेष… चंदैनी गोंदा के सर्जक: दाऊ रामचंद्र देशमुख

हमर छत्तीसगढ के लोक संस्कृति ह अब्बड़ समृद्ध हे. इहां के नाचा, रहस,पंडवानी, पंथी नृत्य, भरथरी, लोरिक चंदा,कर्मा,सुवा,ददरिया, रिलो नृत्य...

साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित कृति – दीवार में एक खिड़की रहती थी

विनोद कुमार शुक्ल दीवार में एक खिड़की रहती थी। खिड़की जिस दीवार में रहती थी वह एक कमरे की दीवार...

वयोवृद्ध नौजवान जयलाल प्रसाद निर्मलकर

वे अब हमारे बीच इस भौतिक संसार में नहीं हैं, लेकिन उनका मुस्कुराता हुआ सौम्य चेहरा हमेशा याद आता है.उनके...

प्रेम पच्चीसा (उपन्यास)

प्रेम, महत्वाकांक्षा, सामाजिक दबावों और एक सार्थक जीवन की खोज के द्वंद्व को दर्शाता है। इसका कथानक (Content) और विषय-वस्तु...

कंकाल हो जाना कला है…

कंकाल हो जाना कला है। जीवन की मृत्युशय्या पर लेटे इच्छामृत्यु का वरदान नहीं मिलता। “अश्वत्थामा हतो हतः” — अर्धवाक्य...

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