April 24, 2026

साहित्य

काश मैं किसी कंपनी का निदेशक (कार्मिक) होता!

डॉ. शैलेश शुक्ला आशियाना, लखनऊ, उत्तर प्रदेश PoetShaielsh@gmail.com, 8759411563 कहते हैं कि इंसान की असली काबिलियत तब नजर आती है...

डॉ. विजय कुमार गुप्ता के छंद कथा समय यथा लोकार्पण समारोह संपन्न

डा विजय गुप्ता मुन्ना के छठवें काव्य संग्रह का लोकार्पण कार्यक्रम 29 जून को ज्येष्ठ नागरिक संघ के भवन आशीर्वाद...

मेरे दूसरे कविता संग्रह सामने से मेरे पर श्याम अंकुरम की आलोचकीय टिप्पणी

(वर्तमान के सच से मुखातिब कवि चंद्रेश्वर) चन्द्रेश्वर का कविता संग्रह 'सामने से मेरे' हमारे समक्ष है। चंद्रेश्वर सरल-सीधे देखने...

सच,आसान नहीं होता एक शादीशुदा आदमी से इश्क़ करना

सच,आसान नहीं होता है एक शादीशुदा आदमी से इश्क़ करना। क्योंकि इश्क़ सिर्फ़ उस आदमी से नहीं होगा, तुम्हें प्यार...

स्त्रियों… सहेजना उन पुरुषों को…

स्त्रियों, सहेजना उन पुरुषों को, जिन्होंने प्रेम किया, पर नहीं लिखा अपने साथ, दीवारों पर तुम्हारा नाम, जिन्होंने प्रेम की...

आंखी के काजर आंसू मा जरगे…….. लिखनेवाले

स्मृतिशेष मधु धांधी के सृजन माधुर्य का अभिनंदन ( 21 जून 1951- 3 अप्रैल 1977 ) फेर परगे संगी अकाल...

प्रतिभाशाली स्त्रियां

प्रतिभाशील स्त्रियों ने स्वयं को निपुण किया चौसठ कलाओं में, उनका प्रबंधन श्रेष्ठ था इतना कि कार्यालय में डाटा एनालिसिस...