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(सुख दुख की कविताएँ ) दुख का सीधा मुकाबला सुख से था सुख के पक्ष में सत्ता थी मक्कारी थी...
(सुख दुख की कविताएँ ) दुख का सीधा मुकाबला सुख से था सुख के पक्ष में सत्ता थी मक्कारी थी...
है शरद ऋतु का आगमन , फूलों की छटा है मनभावन।। नर्म धूप तन-मन को भाये, जैसे हो कोई अपनापन।।...
शरीर मंदिर नहीं है कि धो धोकर इसे रखूँ पवित्र अपरस में रखूँ कोई छू न सके मुझे शरीर किसी...
अधूरेपन के बीच से चला जाऊँगा अपूर्ण कविता की तरह रह जाना चाहता हूँ उसकी संभावना में मुरझाने से पहले...
छोड़ बाबुल तुम्हें दूर कैसे रहें। दूर -रहने का गम हम कैसे सहें।। खूब बचपन में उछली व कूदी जहाँ।...
इक दिन हम सब लोग, मिलेंगे मिट्टी में । लेकिन मिलकर हमीं, खिलेंगे मिट्टी में ।। मिट्टी है अनमोल, इसे...
मैं लिखना चाहता हूँ एक अच्छी प्रेम कविता पर आड़े आ जाता है तुम्हारा प्रेम तुम्हारा प्रेम यानी कि जो...
वीरेन्द्र ' सरल ' ठहाकों के शहंशाह लेख का यह शीर्षक पढ़ने से शायद आपको यह लगे कि किसी कॉमेडी...
सब उम्मीदें टूट गई तो आशाऐं भी रूठ गई तो दुख ने आकर घेर लिया था सबने ही मुँह फेर...
जैसा कि एक कवि कहता है कि मातृभाषा में ही लिखी जा सकती है कविता तो मातृभाषा को याद रखने...