March 8, 2026

साहित्य

मैं शब्दों को नहीं पिरोती…

मैं शब्दों को नहीं पिरोती हां मैं शब्दों को नहीं पिरोती शब्द स्वयं गुंथ जाते हैं भावों के गुलगुल धागों...

चीते का नामीबिया के चीतों को खुला पत्र!

सबसे पहले सभी जन से हाथ जोड़कर माफी! माफी! माफी! जानता हूं,पत्र देर से लिख रहा हूं। क्या करूं, टाइम...

आधे-अधूरे : पूर्णता की तलाश बेमानी है

मोहन राकेश जी का यह नाटक अपने पहले मंचन(1969) से ही चर्चित रहा है.तब से अब तक अलग-अलग निर्देशकों और...

जयंती विशेष (24 सितंबर) : जपो निरन्तर एक ज़बान, हिंदी, हिंदू, हिंदुस्तान..

भारतेंदु युग के प्रमुख स्तंभ पंडित प्रताप नारायण मिश्र की अल्प आयु में पिता की मृत्यु के चलते औपचारिक पढ़ाई...

फ़ासीवाद के खिलाफ आवाज़ बुलंद करने रायपुर में जुटेंगे पांच सौ से ज्यादा लेखक, साहित्यकार और संस्कृतिकर्मी

रायपुर. जन संस्कृति मंच लेखक,साहित्यकारों और संस्कृतिकर्मियों का सबसे महत्वपूर्ण संगठन है. इस संगठन का 16 वां राष्ट्रीय सम्मेलन रायपुर...

हिंदी कविता- एक दीप जलाना चाहूं…

मन की बगिया सजाना चाहूं । मैं एक दीप.....जलाना चाहूं ।। एक दीप.... जीवन के गगन में, एक दीप अंतर्मन...

महारानी बड़ी या शंकराचार्य ?

जीवन का पहला शतक पूरा करने से कुछ महीने पहले ही द्वारिका पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती अपनी इहलीला...