दाऊ रामचन्द्र देशमुख कृत चंदैनी-गोंदा के सह-संगीत निर्देशक “श्री गिरिजा कुमार सिन्हा” की आठवीं पुण्यतिथि पर स्मरणांजलि
मोर संग चलव रे, वा रे मोर पँड़की मैना, धनी बिना जग लागे सुन्ना, चौरा मा गोंदा रसिया, बखरी के...
मोर संग चलव रे, वा रे मोर पँड़की मैना, धनी बिना जग लागे सुन्ना, चौरा मा गोंदा रसिया, बखरी के...
मुझे तुम्हारे होंठ पसंद हैं जब वे शराब से भीगे होते हैं और जंगली चाहत से लाल होते हैं। मुझे...
बरसों-बरस की यात्रा में क्या पाया लड़की? स्वयं से चली कितना पहुँची स्वयं तक जान पाई क्या चाहती है क्यों...
पुरुष से कहा गया जब तुम प्रेम करना तो देखना प्रेयसी की आँखों की गहराई चाँद से चेहरे का आकार...
चार दिनों से सूरज बंदी है बादल के गांव में सुख-सुपास के दिवस खो गए छेद हुए हैं छांव में...
कितनी हवा थी ! जहां कुछ भी नहीं था वहां भी हवा थी दौड़ती भागती हांफती नाचती धूल फांकती चलती...
यह कौन है / परमेन्द्र सिंह यह कौन है जो चला आता है मेरे साथ सदियों से जो न अतीत...
बूढ़ी हुयीं बुआ पर हर सावन में मैके आ जाती हैं! बापू के सँग विदा हो गये सब अधिकार दुआरे...
मोड़ ऐसा भी मोहब्बत में कभी आएगा दिल में रहता है जो वो दिल से उतर जाएगा यूँ तो हर...
अंबर पथ से आती वर्षा। धरा हृदय सहलाती वर्षा। छम-छम बूँदें नाच रहीं हैं, सबका मन बहलाती वर्षा। घनन- घनन...