October 22, 2026

कविता

” छूकर तुमको आई ये पुरवाई”

रूह में बसी मुहब्बत, महक फ़िज़ा में, आती तुमसे होकर, छूकर तुमको ये पुरवाई। महसूस कराती, इश्क़ की रंगत, छितरे...

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