वृक्ष
जीवनदायी सुखदायी धरा के आभूषण वृक्ष । प्राणवायु देते जीवनदायी धरा के आभूषण वृक्ष । फल-फूल देते जीवनदायी धरा के...
जीवनदायी सुखदायी धरा के आभूषण वृक्ष । प्राणवायु देते जीवनदायी धरा के आभूषण वृक्ष । फल-फूल देते जीवनदायी धरा के...
खेतों में, खलियानों में, सावन को बरसते देखा है । झर-झर झरती बूंदें मोती जैसी पेडों के पत्तों पर चमकती...
आज अचानक हमें अचम्भित, सुबह-सुबह कर गयी सँवरकी। कफ़ ने जकड़ी ऐसे छाती, खाँस-खाँस मर गयी सँवरकी। जूठन धो-धोकर,खुद्दारी, बच्चे...
**जब आदमी खुद को बेताज बादशाह समझे आप कुछ भी बयां करें,भूल ही तो है*। **सुनना नहीं चाहता जमीं से...
विधा -विचार कविता परिचय - ज्ञानीचोर मु.पो. रघुनाथगढ़, सीकर राज. पिन - 332027 मो. 9001321438 वक्त की उलझनें करती है...
1 मां की बिंदी लगी है घर के दरवाजे पर और पिता की कलम पड़ी है मेज पर मां सर...
मेरे गाँव की पगडंडी, हर पल ये भान कराती है, कितना कुछ पीछे छूट गया,सपनों में ये कह जाती है...
कविता है जीवन पर भरोसा करने की जगह इस उदास समय में है कंधे पर रखा पूर्वजों का हाथ जब...
सर हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर.. पहाड़ियों पर बसा, बुद्धिजीवियों का नगर! नीचे तराई में छोटा सा गांव ग्वालमंडी! ताज्जुब होता...
विधा - कविता नींद में करवटें बदली खूब स्वप्न में उत्तेजना ये कैसी...! चित्र-विचित्र, अजीब उलझन रोम-रोम में अजीब अकड़न।...