मिट्टी में…
इक दिन हम सब लोग मिलेंगे मिट्टी में । लेकिन मिलकर हमीं खिलेंगे मिट्टी में ।। मिट्टी है अनमोल,इसे उर्वर...
इक दिन हम सब लोग मिलेंगे मिट्टी में । लेकिन मिलकर हमीं खिलेंगे मिट्टी में ।। मिट्टी है अनमोल,इसे उर्वर...
जज़्बात ग़ज़ल संग्रह से कौन है जो बुरा नहीं होता, शख़्स कोई ख़ुदा नहीं होता। बात कुछ तो ज़रूर होगी...
आज और कुछ देर यूँ ही शोर मचाए रखिए। आसमाँ है तो उसे सर पर उठाये रखिए। उँगलियाँ गर नहीं...
अब हमर बीच गहुँरात खाई रथे। रंज राखे इहाँ चार भाई रथे। आदमीपन लुकागे हवे देश मा। काँगरेसी रथे भाजपाई...
न महलों की बुलंदी से न लफ़्ज़ों के नगीने से। तमद्दुन में निखार आता है घीसू के पसीने से। कि...
एक ने पूछा महाराज ! क्या खाते .कब खाते हो कितना खाते हो। मैंने कहा सब कुछ पर बहुत कम-...
जयप्रकाश मानस हस्ती चढ़िए ज्ञान कौ, सहज दुलीचा डारि स्वान रूप संसार है, भूँकन दे झक मारि ।
1. शीर्षक - पुस्तकालय पुस्तकालय की अलमारियों में रखी हुई है किताबें मोटी-मोटी बच्चें पन्ने उथल रहें है ढूंढ रहें...
जिसने भी इस ख़बर को सुना सर पकड़ लिया, कल एक दिये ने आंधी का कॉलर पकड़ लिया ! ~...
जेब में फूटी न हो तो— कौड़ी चमड़ी जाने पर जो न जाए वो— दमड़ी गड़ा मिल जाए तो—धन तहख़ाने...