दो लोकगीत
हर स्त्री के पास होते हैं कम से कम दो लोकगीत एक चौखट के पास बैठकर गुनगुनाया जाता है दिन...
हर स्त्री के पास होते हैं कम से कम दो लोकगीत एक चौखट के पास बैठकर गुनगुनाया जाता है दिन...
पढ़कर -लिखकर आगे बढ़कर उन्नति की मैं, चोटी चढ़कर राष्ट्र का अरमान बनूँगा। बाबा मैं इंसान बनूँगा। नहीं बनूँगा डाॅक्टर...
नज़र कमज़ोर हो गई... दूर का नहीं दीखता साफ मन पटल पर कुछ दृश्य धुंधलाए से हैं नज़र कमज़ोर हो...
तुम्हारी यादों की लहलहाती फसल में बिजूका सी खड़ी थी मैं अपनी सघन अनुभूतियों की पकी फसल के साथ उस...
वासंती संदली बयार बही मेरु पर्वत दीप्त हुआ तुम मिली तो, ठूंठ पर दो कोमल हरे पत्ते निकल आए रेत...
नील गगन के प्यारे पंछी उड़ते कितने सारे पंछी पेड़-गगन हैं इनकी दुनिया दिखते जहाँ हमारे पंछी इनको कभी तंग...
1 कुछ लोग जहरीली शराब पीकर मर जाते हैं मगर हमारी नई तरक्की अब चौतरफा व्याप्त है कि मरने के...
कलम चल रही है, लेखन जारी है....!! सच कहूं .....!! मन लिखने से पहले, अपनी ही कसौटी पर तुलता पूछता...
( भयानक भुगते हुए साल के आखिरी में ) दुःख का कोई मुहूर्त्त नहीं होता सुख का ! घृणा का...
2026 सुना है, तुम अपने साथ उड़ने वाली गाड़ियाँ और आदमियों से ज़्यादा समझदार मशीनें लानेवाले हो। पर सुनो एक...