October 21, 2026

कविता

116 वें जयंती के अवसर पर : श्री कोदूराम दलित अऊ उंकर सियानी गोठ

छत्तीसगढ़ी के ठेठ देहाती कवि डाँ.बलदेव:- लइका पढ़ई के सुघ्घर करत हवँव मैं काम कोदूराम दलित हवय मोर गंवइहा नाम...

तुम देखो ऐसे कि सुर्ख़ लाल रंग हो जाऊँ…

तुम देखो ऐसे कि सुर्ख़ लाल रंग हो जाऊँ, चढ़े कोई भी रंग मगर तेरे रंग में खो जाऊँ। भांग...

सोमालिया की विश्वप्रसिद्ध कवि वार्सन शायर की कुछ कविताएं :

1. प्यार इस तरह करना जैसे कुछ भी न रहे तुम्हारे पास गोपनीय इस तरह कि तुम जाओगे नहीं कभी...

उसके स्वप्नों का रहस्यवाद

उसके स्वप्नों को जानना आसान नहीं ! उसकी इच्छाओं द्वारा निर्देशित, इन स्वप्नों में कथा पात्र जुड़ जाते हैं नए।...

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