कितनी हवा थी…
कितनी हवा थी ! जहां कुछ भी नहीं था वहां भी हवा थी दौड़ती भागती हांफती नाचती धूल फांकती चलती...
कितनी हवा थी ! जहां कुछ भी नहीं था वहां भी हवा थी दौड़ती भागती हांफती नाचती धूल फांकती चलती...
यह कौन है / परमेन्द्र सिंह यह कौन है जो चला आता है मेरे साथ सदियों से जो न अतीत...
बूढ़ी हुयीं बुआ पर हर सावन में मैके आ जाती हैं! बापू के सँग विदा हो गये सब अधिकार दुआरे...
मोड़ ऐसा भी मोहब्बत में कभी आएगा दिल में रहता है जो वो दिल से उतर जाएगा यूँ तो हर...
अंबर पथ से आती वर्षा। धरा हृदय सहलाती वर्षा। छम-छम बूँदें नाच रहीं हैं, सबका मन बहलाती वर्षा। घनन- घनन...
■ शहंशाह आलम ग़ज़ब है भादों, जो मेरे घर को आधा पानी आधा घर दिखा रहा था हावड़ा वाले पुल...
जब मैंने तुझसे प्रेम करने से पहले ही नहीं पूछा तो क्यों कर पूछती भला ..? कोई भी वजह प्रेम...
*** मेरा गांव गांव के लोग गांव की मिट्टी गांव की हरीयाली गांव का खेत खलिहान गांव का हर कोना...
-------------------------------- कविता / डॉ. वागीश सारस्वत हाँ, मैं तुमसे प्यार करता हूँ तुम भी बखूबी जानती हो ये बात जान...
कविता को धैर्य पूर्वक पढ़ सकने का समय दे सकें तो पढ़े। कविता विस्तारित है किंतु , स्त्री मन की...