October 21, 2026

कविता

’तारा’ : संजीव बख्शी का नवीनतम उपन्यास

सेतु प्रकाशन दिल्ली ’तारा’ संजीव बख्शी का नवीनतम उपन्यास है। पिछले वर्ष ही उनके दो उपन्यास ’ढाल चंद हाजिर हो’...

जिम्बाब्वे के शीर्ष कवि चेन्जेराई होव की कुछ और कविताएं : गणतंत्र की शक्ति

गणतंत्र की शक्ति बख़्तरबंद गाड़ियों से नहीं मापी जाती न ही बन्दूकों, विषों, या ग़ायब कर दिये जाने से। गणतंत्र...

एक बहुत पहले लिखी हुई रचना

टपक रहा छप्पर से पानी वह निर्मम बरसात लिखो। लिखो कहानी फिर हल्कू की पूस ठिठुरती रात लिखो। सिसक रही...

बाबा मैं इंसान बनूँगा

पढ़कर -लिखकर आगे बढ़कर उन्नति की मैं, चोटी चढ़कर राष्ट्र का अरमान बनूँगा। बाबा मैं इंसान बनूँगा। नहीं बनूँगा डाॅक्टर...

You may have missed