April 4, 2025

कविता

लोकगीत : गुइयाँ, ससरे में हमाई कदर न भई

बाँके सैंया अपने गोरे तन पे यूँ इतराते नंद जिठानी सँग मिलकर हम पर ताने बरसाते हमरे जियरा की काहू...