क्यों उड़ चले सहसा दिगन्त?
विकुशु! मेरे अंचल के प्रिय कवीन्द्र! आकाश भर अपने परों में - क्यों उड़ चले सहसा दिगन्त? पौष के इस...
विकुशु! मेरे अंचल के प्रिय कवीन्द्र! आकाश भर अपने परों में - क्यों उड़ चले सहसा दिगन्त? पौष के इस...
पतझड़ में शाख से पत्ते जब टूट बिखर जाते हैं मौसम बहार आने पर भी फ़िर वापस शाख से जुड़...
इस हवा में लग रहा है, बर्फ मिश्रित है। कल तलक बरसात झेली, शीत की अब मार है। खेल मौसम...
फूल, पत्ती,जड़ और तना इन अंगों से वृक्ष बना किसी वृक्ष के फल बेहतर फूल किसी पर हैं सुंदर. इन...
जाड़ पूस के गजब जनाथे, जिवरा जाथे काँप। किनकिन किनकिन ठंडा पानी, लागे जइसे साँप। सुरुर सुरुर बड़ चले पवन...
इक दिन हम सब लोग मिलेंगे मिट्टी में । लेकिन मिलकर हमीं खिलेंगे मिट्टी में ।। मिट्टी है अनमोल,इसे उर्वर...
जज़्बात ग़ज़ल संग्रह से कौन है जो बुरा नहीं होता, शख़्स कोई ख़ुदा नहीं होता। बात कुछ तो ज़रूर होगी...
आज और कुछ देर यूँ ही शोर मचाए रखिए। आसमाँ है तो उसे सर पर उठाये रखिए। उँगलियाँ गर नहीं...
अब हमर बीच गहुँरात खाई रथे। रंज राखे इहाँ चार भाई रथे। आदमीपन लुकागे हवे देश मा। काँगरेसी रथे भाजपाई...
न महलों की बुलंदी से न लफ़्ज़ों के नगीने से। तमद्दुन में निखार आता है घीसू के पसीने से। कि...