October 21, 2026

कविता

निहाल सिंह की पांच कविताएं

1. शीर्षक - पुस्तकालय पुस्तकालय की अलमारियों में रखी हुई है किताबें मोटी-मोटी बच्चें पन्ने उथल रहें है ढूंढ रहें...

कंकाल हो जाना कला है…

कंकाल हो जाना कला है। जीवन की मृत्युशय्या पर लेटे इच्छामृत्यु का वरदान नहीं मिलता। “अश्वत्थामा हतो हतः” — अर्धवाक्य...

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