उम्र के सातवें दशक में
एक ने पूछा महाराज ! क्या खाते .कब खाते हो कितना खाते हो। मैंने कहा सब कुछ पर बहुत कम-...
एक ने पूछा महाराज ! क्या खाते .कब खाते हो कितना खाते हो। मैंने कहा सब कुछ पर बहुत कम-...
जयप्रकाश मानस हस्ती चढ़िए ज्ञान कौ, सहज दुलीचा डारि स्वान रूप संसार है, भूँकन दे झक मारि ।
1. शीर्षक - पुस्तकालय पुस्तकालय की अलमारियों में रखी हुई है किताबें मोटी-मोटी बच्चें पन्ने उथल रहें है ढूंढ रहें...
जिसने भी इस ख़बर को सुना सर पकड़ लिया, कल एक दिये ने आंधी का कॉलर पकड़ लिया ! ~...
जेब में फूटी न हो तो— कौड़ी चमड़ी जाने पर जो न जाए वो— दमड़ी गड़ा मिल जाए तो—धन तहख़ाने...
सुनो ज़माना ख़राब है चाहत है मेरी रख मैं आऊँ दो जलते दिए चौखट पर तेरी जिसके भीतर न जाने...
टिमटिमाते दियों से जगमगा रही है अयोध्या सरयू में हो रहा है दीप-दान संगीत और नृत्य के सम्मोहन में हैं...
दीवाली के दिन एक दीया रखवाना कदापि नहीं भूलती थीं माँ उस कमरे में जहाँ होते थे मिट्टी से बने...
जूतों के भीतर जो अंधेरा है उसमें सिर्फ पैर रास्ता देख पाते हैं पैरों के उनमें से निकल जाने के...
कंकाल हो जाना कला है। जीवन की मृत्युशय्या पर लेटे इच्छामृत्यु का वरदान नहीं मिलता। “अश्वत्थामा हतो हतः” — अर्धवाक्य...