April 24, 2026

आलेख

मेरे दूसरे कविता संग्रह सामने से मेरे पर श्याम अंकुरम की आलोचकीय टिप्पणी

(वर्तमान के सच से मुखातिब कवि चंद्रेश्वर) चन्द्रेश्वर का कविता संग्रह 'सामने से मेरे' हमारे समक्ष है। चंद्रेश्वर सरल-सीधे देखने...

आंखी के काजर आंसू मा जरगे…….. लिखनेवाले

स्मृतिशेष मधु धांधी के सृजन माधुर्य का अभिनंदन ( 21 जून 1951- 3 अप्रैल 1977 ) फेर परगे संगी अकाल...

“छत्तीसगढ़ मा “खुमान संगीत” के जन्मदाता खुमानलाल साव जी के पुण्यतिथि मा छन्द के छ परिवार के काव्यांजलि समर्पित हे” –

(1) मत्त सवैया - मँय छत्तीसगढ़ के बेटा अंव मोर रग-रग मा संगीत बसे, मँय हरमुनियम के लहरा अंव मँय...

“छत्तीसगढ़ की सरकार, खुमान-संगीत को उसी तरह से स्थापित करने की पहल करे जैसे कि बंगाल में रवींद्र-संगीत को स्थापित किया गया”

"खुमान-संगीत" यह शीर्षक ठीक वैसा ही है जैसे रवींद्र-संगीत। यह बात और है कि बंगाल ने रवींद्र-संगीत को मान्यता प्रदान...

मधुर छत्तीसगढ़ी गीतों का स्वर्णिम इतिहास

"मोर संग चलव........" (भाग - 1) इन तीन शब्दों के साथ ही कवि-गीतकार-गायक लक्ष्मण मस्तुरिया की साँवली-सलोनी सूरत आँखों के...

हम वही सुन पाते हैं, जो हम खोज रहे हैं…

मैं कुछ वर्षों तक सागर में था। वहां एक मिठाईवाला है। वैसी गुजिया बनानेवाला पूरे मुल्क में कहीं भी नहीं...

व्यंग्य : चूके हुए तीरों भूलों को नमन

एक कवि की पंक्तियां हैं ,"नमन हैं उन्हें जो चले यात्रा पर लेकिन पहुंच कभी नहीं पाए/ प्रणाम है उन्हें...