शब्द – स्वैराचार
एक निराकार झंकृति इन दिनों हवा में तैर रही है। घटना अमूर्त है और बिना ठोस मानवीय आकार के सर्वत्र...
एक निराकार झंकृति इन दिनों हवा में तैर रही है। घटना अमूर्त है और बिना ठोस मानवीय आकार के सर्वत्र...
(वर्तमान के सच से मुखातिब कवि चंद्रेश्वर) चन्द्रेश्वर का कविता संग्रह 'सामने से मेरे' हमारे समक्ष है। चंद्रेश्वर सरल-सीधे देखने...
स्मृतिशेष मधु धांधी के सृजन माधुर्य का अभिनंदन ( 21 जून 1951- 3 अप्रैल 1977 ) फेर परगे संगी अकाल...
जब तक उस कोठरी नुमा कमरे में , जिसे आयोजक ग्रीन रूम कह रहे थे , चाय का तीसरा कप...
(1) मत्त सवैया - मँय छत्तीसगढ़ के बेटा अंव मोर रग-रग मा संगीत बसे, मँय हरमुनियम के लहरा अंव मँय...
"खुमान-संगीत" यह शीर्षक ठीक वैसा ही है जैसे रवींद्र-संगीत। यह बात और है कि बंगाल ने रवींद्र-संगीत को मान्यता प्रदान...
"मोर संग चलव........" (भाग - 1) इन तीन शब्दों के साथ ही कवि-गीतकार-गायक लक्ष्मण मस्तुरिया की साँवली-सलोनी सूरत आँखों के...
मैं कुछ वर्षों तक सागर में था। वहां एक मिठाईवाला है। वैसी गुजिया बनानेवाला पूरे मुल्क में कहीं भी नहीं...
एक कवि की पंक्तियां हैं ,"नमन हैं उन्हें जो चले यात्रा पर लेकिन पहुंच कभी नहीं पाए/ प्रणाम है उन्हें...
पिछले दसेक दिनों से हमारे इधर माटी के इन पुतरा पुतरी की धज सड़क किनारे देखता आ रहा हूँ। रंग...