” नव वर्ष की आहट…”
वो गुजर गई दिसंबर की तरह , मैं ठहर गया जनवरी की तरह । फासले तो इतने भी न थे...
वो गुजर गई दिसंबर की तरह , मैं ठहर गया जनवरी की तरह । फासले तो इतने भी न थे...
खुदगजॅ जमाने में खुदगजॅ जमाने में दीवाने हजारों हैं मरने के लिए देखो परवाने हजारों हैं। करते हैं खुद खुशी...
बहर - बहरे रमल मुसम्मन महज़ूफ़ अर्कान - फ़ाइलातुन् फ़ाइलातुन् फ़ाइलातुन् फ़ाइलुन् वज़्न - 2122 2122 2122 212 🌹 ग़ज़ल🌹...
"नवगीत के समर्थ आलोचक और युवा नवगीतकार अवनीश सिंह चौहान के संपादन में आया हुआ 'नवगीत वाङ्मय' हमारे सामने है।...
बहुत से व्यक्ति किसी विधा-विशेष में दक्ष होते हैं, उन्हें हम उनकी विशेष विधा के कारण पहचानते हैं। कुछ व्यक्ति...
24/09/2021 मेरी "दास्तान" को न छेड़ मेरे हमदम दर्द बहुत है इस इश्क़ का किस्सा भी मुझे "मशहूर" लगता है...
मोहन राकेश जी का यह नाटक अपने पहले मंचन(1969) से ही चर्चित रहा है.तब से अब तक अलग-अलग निर्देशकों और...
तटस्थता का इतिहास, उसके गद्दार होने की गवाही में साबित हो चुका है। इस पर हमारे समय के कई महत्वपूर्ण...
मैं ज़ख़्म दिल का दिखाऊँ कैसे? कहानी ग़म की सुनाऊँ कैसे? गले किसी को लगाऊँ कैसे? क़सम तुम्हारी भुलाऊँ कैसे?...