April 4, 2025

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बद्री प्रसाद वर्मा अनजान की गजलें

खुदगजॅ जमाने में खुदगजॅ जमाने में दीवाने हजारों हैं मरने के लिए देखो परवाने हजारों हैं। करते हैं खुद खुशी...

हिन्दी साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत ग़ज़ल संग्रह फल खाए शजर से यह ग़ज़ल प्रस्तुत है-

बहर - बहरे रमल मुसम्मन महज़ूफ़ अर्कान - फ़ाइलातुन् फ़ाइलातुन् फ़ाइलातुन् फ़ाइलुन् वज़्न - 2122 2122 2122 212 🌹 ग़ज़ल🌹...

नवगीत वाङ्मय : एक स्वागत योग्य संकलन — गंगाप्रसाद ‘गुणशेखर

"नवगीत के समर्थ आलोचक और युवा नवगीतकार अवनीश सिंह चौहान के संपादन में आया हुआ 'नवगीत वाङ्मय' हमारे सामने है।...

06 अक्टूबर : तीसरी पुण्यतिथि “डॉ. बल्देव : एक जीती-जागती संस्था”

बहुत से व्यक्ति किसी विधा-विशेष में दक्ष होते हैं, उन्हें हम उनकी विशेष विधा के कारण पहचानते हैं। कुछ व्यक्ति...

आधे-अधूरे : पूर्णता की तलाश बेमानी है

मोहन राकेश जी का यह नाटक अपने पहले मंचन(1969) से ही चर्चित रहा है.तब से अब तक अलग-अलग निर्देशकों और...