’तारा’ : संजीव बख्शी का नवीनतम उपन्यास
सेतु प्रकाशन दिल्ली ’तारा’ संजीव बख्शी का नवीनतम उपन्यास है। पिछले वर्ष ही उनके दो उपन्यास ’ढाल चंद हाजिर हो’...
सेतु प्रकाशन दिल्ली ’तारा’ संजीव बख्शी का नवीनतम उपन्यास है। पिछले वर्ष ही उनके दो उपन्यास ’ढाल चंद हाजिर हो’...
छत्तीसगढ़ के इतिहास और संस्कृति को समझने मे पूर्व के अध्येताओं का अध्ययन महत्वपूर्ण सीढ़ियां हैं जिनसे होकर हम वर्तमान...
तो फ़रवरी जा रहे हो तुम… कैलेंडर की दीवार से उतरते हुए जैसे कोई महीना नहीं, एक अनकहा संवाद विदा...
शब्द विचार आज का शब्द है- केरलम – केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद केरल को अब केरलम के नाम...
कितनी बदल चुकी है दुनिया भावना, संवेदना, सम्मान,, सबको कुचलती हुई बेलगाम राजनीति , और इसके कुचक्रों में फंसे लोग,,...
“हाँ, मैं सपनों का सौदागर हूँ…” — जब सदन में यह स्वीकारोक्ति स्वयं कोई नेता करे, तो वह वाक्य व्यंग्य...
हमर अंचल के वरिष्ठ साहित्यकार श्री सुशील भोले जी ह अपन जीवन के कुछ समय नगरगाँव म तको बिताय रिहिस...
गणतंत्र की शक्ति बख़्तरबंद गाड़ियों से नहीं मापी जाती न ही बन्दूकों, विषों, या ग़ायब कर दिये जाने से। गणतंत्र...
आलेख - स्वराज करुण *** आज से कुछ दशक पहले कवियों में साझा कविता -संग्रह छपवाने का उत्साह हुआ करता...
समकालीन समाज की सोनोग्राफी अलका सरावगी जितना सुगठित वाक्य लिखती हैं वैसा ही गठन उनके उपन्यास ‘कलकत्ता कॉस्मोपॉलिटन : दिल...