March 7, 2026

साहित्य

राम की बहुरिया बीमार है अवध में

हिन्दी नवगीत के प्रखर रचनाकार भाई भारतेन्दु मिश्र ने भी अपने लिए ज़िन्दगी का नेपथ्य चुन लिया। उन्हीं के एक...

म्हैं तौ छोडूँ पण कांबल नीं छोड़ै

एक बार दो मित्र चाँदनी रात में नदी के किनारे घूम रहे थे। एक मित्र को अचानक पानी के बहाव...

मिली कैसे रविवार की छुट्टी !

कहते हैं मुग़लों के शासन-काल में भारतीय कामगारों को शुक्रवार के दिन छुट्टी दी जाती थी । बदमाश अँगरेज़ों ने...

“चुड़ैल” शब्द की असली कहानी : भाषा-विज्ञान की नज़र से

डॉ. मेनका त्रिपाठी मेरे मोबाइल में लिखा हुआ आ रहा है क्या सोच रही होतो अभी मैं चाय पी रही...

अंतर्राष्ट्रीय अनुवाद दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

इस अवसर पर पढ़िए अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार- 2025 विजेता बानू मुश्ताक की कहानी 'कफ़न' का मेरा अनुवाद. यह अनुवाद नया...

प्रतीक्षा में समय रेत की तरह नहीं फिसलता

प्रतीक्षा कोई सूखा पत्ता नहीं, जो हवा में बिखर जाए। जब मित्र की आहट कानों में गूँजती है, तो मन...