राम की बहुरिया बीमार है अवध में
हिन्दी नवगीत के प्रखर रचनाकार भाई भारतेन्दु मिश्र ने भी अपने लिए ज़िन्दगी का नेपथ्य चुन लिया। उन्हीं के एक...
हिन्दी नवगीत के प्रखर रचनाकार भाई भारतेन्दु मिश्र ने भी अपने लिए ज़िन्दगी का नेपथ्य चुन लिया। उन्हीं के एक...
एक बार दो मित्र चाँदनी रात में नदी के किनारे घूम रहे थे। एक मित्र को अचानक पानी के बहाव...
कहते हैं मुग़लों के शासन-काल में भारतीय कामगारों को शुक्रवार के दिन छुट्टी दी जाती थी । बदमाश अँगरेज़ों ने...
जयप्रकाश मानस कुछ रंग बचे, कुछ रूप कुछ डाल बचे, कुछ पात बची कुछ धूप, बचे कुछ कूप। कुछ शब्द...
17 अप्रैल लखनऊ हम मेहमान नवाज़ लोग हैं मेहमान नवाज़ी हमारे खून में है... इस एक लाइन ने न जाने...
डॉ. मेनका त्रिपाठी मेरे मोबाइल में लिखा हुआ आ रहा है क्या सोच रही होतो अभी मैं चाय पी रही...
इस अवसर पर पढ़िए अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार- 2025 विजेता बानू मुश्ताक की कहानी 'कफ़न' का मेरा अनुवाद. यह अनुवाद नया...
रंग में डूबे हुए शब्द - दिवाकर मुक्तिबोध आज उनकी न तो जयंती है और न ही पुण्य तिथि पर...
प्रतीक्षा कोई सूखा पत्ता नहीं, जो हवा में बिखर जाए। जब मित्र की आहट कानों में गूँजती है, तो मन...
मैं थकी नहीं, मैं रुकी नहीं, कुछ करने की अभिलाषा में मैं थकी नहीं, मैं रुकी नहीं। मौके आए जाने...