“विश्व महतारी भाषा दिवस” – छत्तीसगढ़ी
घर के जोगी जोगड़ा, आन गाँव के सिद्ध - तइहा के जमाना के हाना आय। अब हमन नँगत हुसियार हो...
घर के जोगी जोगड़ा, आन गाँव के सिद्ध - तइहा के जमाना के हाना आय। अब हमन नँगत हुसियार हो...
लक्खू, राम-भजन कब होई? हाथ-गोड़ अब सिकुड़न लागे, कठिन वक्त है आगे, माया ठगनी के चक्कर में, फिरो न भागे-भागे।...
भर्री भाँठा खार भँठागे, घटके कती उन्हारी। चना गहूँ सरसो अरसी के, चक हे ना रखवारी।। पहली जम्मों गांव गांव...
वश में कर सके, है बस में किस के ये बंधन - डोर तुमने ही बांधे कस के सांसों की...
- रज़िया सज्जाद ज़हीर प्रगतिशील लेखक संघ के संस्थापक सज्जाद जहीर को तो पूरी दुनिया जानती है लेकिन उनकी अफसाना...
हमन जब कभू छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक मंच के माध्यम ले छत्तीसगढ़ी गीत-संगीत के जागरण अउ गौरवशाली रूप के बात करथन त...
एक छोटे-से बच्चे ने मूँद ली हैं आँखें सब्जी-भाजी और ऐसे ही कुछ नापसंद स्वाद की तरफ़ से जिन्हें माँ...
समकालीन कविता में गहरी दिलचस्पी रखनेवाले श्रीनारायण समीर एक प्रबुद्ध आलोचक हैं। उन्होंने नक्सल बाड़ी आंदोलन और आठवें दशक की...
बनारस में दो रातें बीत चुकी थीं फिर भी बेचैनी भीतर थी. घाटों में पैदल से लेकर नाव तक मस्ती...
(अट्ठाइसवीं पुण्यतिथि पर स्मरणांजलि) केदार यादव का जन्म दुर्ग में 06 जून 1952 हो हुआ था। उनके दादा बाँस गीत...