सुनो
काग़ज़ की नाव थी तुमने जो भेजी थी मेरे लिए,,, अच्छा हुआ तुमने पानी पर, पानी से बनाया था आशियाना,...
काग़ज़ की नाव थी तुमने जो भेजी थी मेरे लिए,,, अच्छा हुआ तुमने पानी पर, पानी से बनाया था आशियाना,...
अनुवाद - अख्तर अली पुण्य तिथि पर स्मृति लेख जब जब उनकी पुण्यतिथि आती है वह बहुत याद आते हैं...
युवा कवि सतीश कुमार सिंह मुख्यतः नव गीतकार के रूप में जाने जाते रहे हैं, मगर इसके समानांतर वे कविताएं...
हिंदी ग़ज़ल : सब कुछ तेरा... हवाएं तेरी, शहर तेरा, मंजिल तेरी, पर ख़्वाब सारे मेरे होंगे । फिजाएं तेरी,...
चाहत बहुत, पुरानी अपनी। इतनी राम, कहानी अपनी।। इन सपनों का, राजा अपना। औ सपनों की, रानी अपनी।। सौ रंगों...
वेदव्यास ने क्या कहा या बोला था? हमें पता नहीं.हम तो केवल उतना ही जानते है जिसे गणेश जी ने...
वक्त बदल जाता बहुत, सब दिन नहीं समान। शेष समय जरूर करो, तुम पूरे अरमान। मुखिया मुख सो चाहिए, तुलसी...
लन्दन की पार्लियामेंट स्क्वेयर पर टहलते हुए अचानक गांधी दिख गए। बेहद आश्चर्य हुआ। ब्रिटिश क्राउन का सबसे बड़ा ज्वेल-...
अस्मिता और स्वाभिमान के अगस्त अंक में आइये मिलते हैं... "चंदैनी-गोंदा" महान सांस्कृतिक लोकमंच के एक और सितारे से आज...
इंतज़ार तुम्हारा किया पल पल जब तब था बस इतना ही ख़याल क्या इंतज़ार किया था तुमने भी,,, तुम्हारे लम्स...