ईद मुबारक आप सभी को
डॉ हूबनाथ पाण्डेय की कविता- *ईद मुबारक!* इस बार भी शव्वाल का चांँद देखा और उदास हो गया इस बार...
डॉ हूबनाथ पाण्डेय की कविता- *ईद मुबारक!* इस बार भी शव्वाल का चांँद देखा और उदास हो गया इस बार...
ये असर होता है दुआओं में ज़र्रे ज़र्रे में तेरी रहमत है नूर ही नूर है जहाँ तू है अपने...
बेटी मैं बेटी बहुत दुलारी हूँ । मैं सारे घर को प्यारी हूँ ।। मैं परी पिता के आँगन की।...
जोया के लिव इन रिलेशनशिप में रहने के फैसले ने कोहराम मचा दिया घर में पिता औरभाई की चिल्लाहट सुन...
रोशनी आती रही उन जर्जर झरोखों से धुंधले होते गये क्यूँ अपनों के साये कानों में गूँजती रहीं यादों की...
हर शख्स में तुझको तलाश किया किसी की बातों में तुम मिल जाते किसी के शब्दों की शक्ल में तुम...
धुंआ -धुंआ है आज शहर में,आग उगलते गांव दिखें। चादर छोटी झीनी- झीनी,दुख के लंबे पांव दिखें। छल छद्मों का...
मैं आसमान में चाँद देख रहा हूं किन्तु चाँद को चाँद कह पाने के भय से सहमा हुआ हूं मुझे...
दो टूक बात ............इसमें हेर फेर नही है दुनिया में कोई....सेर.......सवा सेर नही है तुमको भी सब मिलेगा..पहले कर्म तो...
भावना को अपने शब्दों में पिरोते हैं, चलो न अपनी अलग राह बनाते हैं। कुछ चुनिंदा साथी मिलकर हम सृजन...