गीत
छन-छन करती घर आँगन में, शाम सुबह दिन रात! सुनो तो! पायलिया करती है क्या बात। बाबुल के घर कदम...
छन-छन करती घर आँगन में, शाम सुबह दिन रात! सुनो तो! पायलिया करती है क्या बात। बाबुल के घर कदम...
कहा था उसने कि पूरे वो ख़्वाब कर देगा, सफ़र में काँटे मिले तो गुलाब कर देगा । उसे पता...
उसकी आस इस तरह पलकों पे उतरती है जैसे तप्त दोपहरी के बाद अंबर से हौले-हौले साँझ उतरती है ...और...
नवा बछर के नवा बिहनिया हो....... नवा सुरुज अब आ गे। आवव संगी जुरमिल चलबो, अँधियारी हा भगा गे।। नवा...
वन उपवन खोते गए, जब से हुआ विकास । सच पूछें तो हो गया, जीवन कारावास ।। पवन विषैली आज...
इस दहशतगर्द मौसम में कुत्ते भौंकते तो है जबकि आदमी सभ्यता का लबादा ओढकर दडबे में हो जाता है कैद...
रात, कुत्ते रो रहे थे, पता नहीं अशगुन होने वाला था हमारे लिए या वे हमारे किए अशगुन पर रो...
ऐसा बहुत कुछ है जो जीवन में मैने नही किया लेकिन ऐसा भी कुछ है जो सिर्फ मैने किया। नही...
ऐसे ही किसी ऊँघते हुए दिन में आह्वान और विसर्जन की तय सीमा को लाँघकर झिँझोड़ने लगती है हठिली यह...
जाओ उन्हे बता देना -------------------- जाकर कह देना उन्हे मैं बहुत दूर निकल आई हूं इतनी कि लौट भी नही...