“हे आम्र-वृक्ष “
आज अपने गांव जाते समय आम्र-वृक्ष आम्र मंजरी से श्रृंगारित बहुत ही लुभावने लगे कुछ पँक्तियाँ भी मचल उठीं मन...
आज अपने गांव जाते समय आम्र-वृक्ष आम्र मंजरी से श्रृंगारित बहुत ही लुभावने लगे कुछ पँक्तियाँ भी मचल उठीं मन...
चलो आज फ़ुरसत से कुछ पन्ने पुराने पलट लिए जाएं ll इस से पहले कि बन जाऐं नासूर सब के...
है आंख नम तो क्या मुस्कुरायें। बताओं कब तक ये गम छुपायें? तुम्हें मुबारक तुम्हारी खुशियां, हमारी किस्मत है छ्टपटायें...
शिव मेरे!! माना तुम हो औघड़ दानी मैं भी गंग धार नही न धरो मुझे सिर माथे सिरमौर बना न...
रंगों और रिश्तों के मोहबंध हर रिश्ते के अलग अलग रंग! ताज़ा रंगी हवा में टंगी.. लहराती-फहराती सी ओढ़नियों के...
छन-छन करती घर आँगन में, शाम सुबह दिन रात! सुनो तो! पायलिया करती है क्या बात। बाबुल के घर कदम...
कहा था उसने कि पूरे वो ख़्वाब कर देगा, सफ़र में काँटे मिले तो गुलाब कर देगा । उसे पता...
उसकी आस इस तरह पलकों पे उतरती है जैसे तप्त दोपहरी के बाद अंबर से हौले-हौले साँझ उतरती है ...और...
नवा बछर के नवा बिहनिया हो....... नवा सुरुज अब आ गे। आवव संगी जुरमिल चलबो, अँधियारी हा भगा गे।। नवा...
वन उपवन खोते गए, जब से हुआ विकास । सच पूछें तो हो गया, जीवन कारावास ।। पवन विषैली आज...