April 24, 2026

कविता

मैं शब्दों को नहीं पिरोती…

मैं शब्दों को नहीं पिरोती हां मैं शब्दों को नहीं पिरोती शब्द स्वयं गुंथ जाते हैं भावों के गुलगुल धागों...

हिंदी कविता- एक दीप जलाना चाहूं…

मन की बगिया सजाना चाहूं । मैं एक दीप.....जलाना चाहूं ।। एक दीप.... जीवन के गगन में, एक दीप अंतर्मन...