दुविधा के दुर्गम जंगल में
दुविधा के दुर्गम जंगल में हम राही पथ भटक गये हैं , जाने हम किन -किन की आंखों में बरसों...
दुविधा के दुर्गम जंगल में हम राही पथ भटक गये हैं , जाने हम किन -किन की आंखों में बरसों...
आज फिर 8 मई आई है साथ अपने मां को समर्पित दिन लाई है बात चली है दोस्तों में, भाई...
दुविधा के दुर्गम जंगल में हम राही पथ भटक गये हैं , जाने हम किन -किन की आंखों में बरसों...
यदि मुझे काजल लगाना पड़े तुम्हारे लिए, बालों और चेहरे पर लगाना पड़े रंग , तन पर छिड़कना पड़े सुगंध,...
आपत्तिअन्यायसंघर्ष में भी रहे देव अपनी अलख तुम जगाए | प्रात: किरण-से उगेतुमजगत में (मुकुलित कमल-सा हुआ मुग्धनत मैं )...
आधी रात बाद जागते हुए ऑनलाइन देखकर पूछता है दोस्त, जाग क्यों रहे हो ? कैसे बताऊं उसे टूटन और...
आज एक टुकड़ा धूप मेरे हिस्से में आई है, मैंने फिर दिल की ज़मीं पर ख़्वाबों की फसल उगाई है।...
मैं शब्दों को नहीं पिरोती हां मैं शब्दों को नहीं पिरोती शब्द स्वयं गुंथ जाते हैं भावों के गुलगुल धागों...
मौत के बाद का किसने ज़हान देखा है कुछ कहा, कुछ सुना कोरा बयान देखा है। कोई जन्नत न मैंने...
मन की बगिया सजाना चाहूं । मैं एक दीप.....जलाना चाहूं ।। एक दीप.... जीवन के गगन में, एक दीप अंतर्मन...