पूजा दुबे की कविताएं
बीत गया है जाने क्या-क्या। और बचा है जाने क्या-क्या। हाथ बढ़ाकर क्या मैं दे दूं, माँग रहा है जाने...
बीत गया है जाने क्या-क्या। और बचा है जाने क्या-क्या। हाथ बढ़ाकर क्या मैं दे दूं, माँग रहा है जाने...
कूड़ाघर नदियाँ बनीं, सूखे सब तालाब। खोज रही है सभ्यता, अब चंदा पर आब।। हम नदियों के मार्ग को, नित...
सबने फूल -फूल चुन लिए,मैं कांटे उठा लाया। सब फूल झड़ गए,कांटों से कांटे निकालता रहा।। उनकी मुट्ठी में चांद...
जड़ जिंदा है तो, पेड़ हरा है वो फलता- फूलता रहेगा प्रकृति से जुड़ा रहेगा । ठीक ऐसे ही इंसान...
दुःख सहकर सुख की ओर चलना होगा, फूलों से अगर करनी है दोस्ती तो काॅंटों को सहना होगा । दर्द...
14 सित. राजभाषा दिवस के अवसर पर आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। मिसरी सी मीठी हूक लिए पानी...
रहइया आय परवत-घाटी के सनइया ए चिखला-माटी के धनुष-बान धरे बरछा-भाला पहिने लोहा-पीतल के माला थोरहे पाके बड़ भागी मानय...
1 जब अरमान फलेगा तो। मन के साथ चलेगा तो। आँखें जी भर सो लेगी, सूरज, शाम ढलेगा तो ।...
-छत्तीसगढ़ लोक लोक शैली में गांधी के कार्य को याद करते हुए द्वारिकाप्रसाद 'विप्र' लिखते हैं- ●'देवता बनके आये गांधी...
भाव की बहती धराएँ, दे रहीं हमको किनारा मैं पथिक हूँ गीत का अरु, गीत ही अंतिम सहारा।। सुरसरि में...