April 24, 2026

कविता

डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय की कविताएं

सबने फूल -फूल चुन लिए,मैं कांटे उठा लाया। सब फूल झड़ गए,कांटों से कांटे निकालता रहा।। उनकी मुट्ठी में चांद...

मैं पथिक हूँ गीत का अरु, गीत ही अंतिम सहारा

भाव की बहती धराएँ, दे रहीं हमको किनारा मैं पथिक हूँ गीत का अरु, गीत ही अंतिम सहारा।। सुरसरि में...