डॉ. प्रेमकुमार पाण्डेय की कविताएं
सबने फूल -फूल चुन लिए,मैं कांटे उठा लाया। सब फूल झड़ गए,कांटों से कांटे निकालता रहा।। उनकी मुट्ठी में चांद...
सबने फूल -फूल चुन लिए,मैं कांटे उठा लाया। सब फूल झड़ गए,कांटों से कांटे निकालता रहा।। उनकी मुट्ठी में चांद...
जड़ जिंदा है तो, पेड़ हरा है वो फलता- फूलता रहेगा प्रकृति से जुड़ा रहेगा । ठीक ऐसे ही इंसान...
दुःख सहकर सुख की ओर चलना होगा, फूलों से अगर करनी है दोस्ती तो काॅंटों को सहना होगा । दर्द...
14 सित. राजभाषा दिवस के अवसर पर आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। मिसरी सी मीठी हूक लिए पानी...
रहइया आय परवत-घाटी के सनइया ए चिखला-माटी के धनुष-बान धरे बरछा-भाला पहिने लोहा-पीतल के माला थोरहे पाके बड़ भागी मानय...
1 जब अरमान फलेगा तो। मन के साथ चलेगा तो। आँखें जी भर सो लेगी, सूरज, शाम ढलेगा तो ।...
-छत्तीसगढ़ लोक लोक शैली में गांधी के कार्य को याद करते हुए द्वारिकाप्रसाद 'विप्र' लिखते हैं- ●'देवता बनके आये गांधी...
भाव की बहती धराएँ, दे रहीं हमको किनारा मैं पथिक हूँ गीत का अरु, गीत ही अंतिम सहारा।। सुरसरि में...
कोई फकीर , बन राहगीर, नर्मदा तीर, हिम सा शरीर, वह परम वीर, भू चला चीर, गर्जन अधीर, कहता समीर...
कुछ दिन पूर्व कॉलोनी के मुख्य गेट पर विजित शर्मा के नाम का एक बड़ा सा सचित्र बैनर लगा था।...