April 24, 2026

कविता

लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव की कविताएँ

खुशियों का पुष्पन-पल्लवन... धरती से धड़ाधड़ जंगल कटते जा रहे हैं कंक्रीट के महल खड़े होते जा रहे हैं हमारे...

देख सजनी देख ऊपर

देख सजनी देख ऊपर।। इंजनों सी दड़दड़ाती, बम सरीखी धड़धड़ाती रेल जैसी जड़बड़ाती, फुलझड़ी सी तड़तड़ाती।। पंछियों सी फड़फड़ाती,पल्लवों को...