सतपाल “ख़याल” की ग़ज़लें
शायर : सतपाल “ख़याल” ग़ज़ल : 1 जब से बाज़ार हो गई दुनिया तब से बीमार हो गई दुनिया चंद...
शायर : सतपाल “ख़याल” ग़ज़ल : 1 जब से बाज़ार हो गई दुनिया तब से बीमार हो गई दुनिया चंद...
बस से उतरकर जेब में हाथ डाला तो मैं चौंक पड़ा। जेब कट चुकी थी। जेब में था भी क्या?...
सुशांत सुप्रिय " पापा , भगवानजी तो इन्सानों को बड़ी मेहनत से बनाते होंगे । जब एक इंसान दूसरे इंसान...
मैं किसी और के जैसा,क्यों बनूँ? जैसा हूँ वैसा ही रहूँगा । दूसरों की नकल क्यों करूँ? मैं अपनी भावनाएँ...
जंगल को बचाने के लिए, पहाड़ पर कविता जाएगी, कुल्हाड़ी की धार के लिए, कमरे में दुआ मांगी जाएगी, पहाड़...
आंखों ने देखने लगे हैं उड़ते बादल । आंखों में तैरने लगे हैं उड़ते बादल ।। आंखों ने देखे थे...
मेरी प्रिय सखी कभी-कभी तुम्हारे हिस्से का आसमां और तुम्हारे हिस्से की ज़मी कोई दूसरा ही चुनेगा कुछ पसंदीदा रंगों...
पिंजरा मुझे भी अपनी व्यथा कहने दो। पिंजरे से मुझे आजाद रहने दो। इस दुनिया को देखना है मुझे भी...
पानी है पर प्यास कहाँ है, चातक सा अहसास कहाँ है।। अब दिल है सोने चाँदी के, रिश्तों में विश्वास...
11/09/2021 अतीत के स्मृति सागर में जब -जब लगाती हूँ गोतें तब -तब खिल उठती हूँ मैं ले आती हूँ...