October 22, 2026

कविता

ट्यूबलाइट जलनी चाहिए!

ट्यूबलाइट जलनी चाहिए! खुलेंगी करतूतें काली अंधेरगर्दी के काले चेहरें वर्दी में उलझी मोहरें अपराधों की काली छाया उजागर उत्कोच...

इक ताज़ा ग़ज़ल के चंद अशआर आप सभी की खिदमत में पेश है मुलाहिज़ा हो…..

हौसलों का क्या करेंगे जब सलामत सर नहीं कैसे ले परवाज़ वो पंछी कि जिसके पर नहीं //१// इक मुसलसल...

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