दाग़ देहलवी की कुछ रचनाएं
"दाग देहलवी" बात मेरी कभी सुनी ही नहींजानते वो बुरी भली ही नहीं दिल-लगी उन की दिल-लगी ही नहींरंज भी...
"दाग देहलवी" बात मेरी कभी सुनी ही नहींजानते वो बुरी भली ही नहीं दिल-लगी उन की दिल-लगी ही नहींरंज भी...
ग़ज़ल का प्रयास हम बुरे हैं या भले हैंएक अपनी रह चले हैं ख़्वाब देखे ढेर सारेबेख़ुदी के सिलसिले हैं...
मैं स्त्री हूँ बस स्त्री रहने दो नहीं बनना है मुझें बुद्ध, महावीरन निर्वाण प्राप्ति की चाह है मुझेंइस मोह...
संघर्ष जन्म से मृत्यु पर्यन्तकरता है तू संघर्षतब तो तूने जीवनजीया भरपूर। मां की कोख मेंनन्हे अंकुर से लेकरदुनिया में...
राजा जी ने दिए हैं आंसू ------------------------‐-----राजा जी ने दिए हैं आंसूहंसकर रोना है,हमने जो बिरवे बोएफल उसी का होना...
मां के बारे में क्या लिखूं…तेज धूप में घनी छांव सीसर्दी में ठिठुरते तन कोरुई की नरम रजाई सीजिसकी गोद...
तुम तो हसीं ख्वाब हो,जो देखा है मैंने जागी आँखों से तुम तो वो माहताब हो,जो बिखेरता है प्रेम-रूपी चाँदनी...
बाबा बाबा जंगल जा रही हूँलकड़ी लेनेदोपहर तक ना लौटूंमुझे तलाशने आना । बाबा ध्यान से चलनामेरी टूटी हुई चूड़ीतेरे...
पंचांग कुछ चीजें हकीकत में जितनी सुंदर होती हैउतनी तस्वीरों में नहीं लगतीजैसे आसमाँ पे उँकेरा गया सोलह कलाओं का...
बैसाख की गर्म रातों मेंआसमान के चँदोवा नीचेपंखा झलती, कहानी सुनातीनानी अक्सर सो जातीं छूट जाता कहानी का सिराबच्चे नानी...