March 6, 2026

आलेख

मधुर छत्तीसगढ़ी गीतों का स्वर्णिम इतिहास

"मोर संग चलव........" (भाग - 1) इन तीन शब्दों के साथ ही कवि-गीतकार-गायक लक्ष्मण मस्तुरिया की साँवली-सलोनी सूरत आँखों के...

हम वही सुन पाते हैं, जो हम खोज रहे हैं…

मैं कुछ वर्षों तक सागर में था। वहां एक मिठाईवाला है। वैसी गुजिया बनानेवाला पूरे मुल्क में कहीं भी नहीं...

व्यंग्य : चूके हुए तीरों भूलों को नमन

एक कवि की पंक्तियां हैं ,"नमन हैं उन्हें जो चले यात्रा पर लेकिन पहुंच कभी नहीं पाए/ प्रणाम है उन्हें...

मुन्नी का पौधा, कहानी संग्रह : सुधा वर्मा

वरिष्ठ लेखिका श्रीमती सुधा वर्मा लंबे समय से साहित्य से जुड़ी हुई हैं। उनका कार्य मुख्यतः छत्तीसगढ़ी साहित्य,लोक साहित्य एवं...

ये मालदीव के नजारे नहीं हैं यहाँ आप ऋषिकेश…

ये मालदीव के नजारे नहीं हैं यहाँ आप ऋषिकेश से सिर्फ 1.30 घंटे में पहुंच सकते हैं,ये टिहरी झील के...

मेरा दुलारा बस्तर ( कहानी – अंतिम क़िश्त )

अब तक --कांकेर के आदिवासी समूह ने ब्रितानी फौज़ के 50 लोगों को शहीद कर बाक़ी लोगों को धमतरी और...

लोक का प्रतिबिंब-” सुरति अउ सुरता”

वीरेन्द्र सरल लोक साहित्य , लोक जीवन के अनुभवों का निचोड़ होता है। जिसके आलोक में हम अपने वर्तमान को...

ग़ज़ल की चौखट पर एक नयी दस्तक

यह दस्तक दी है कवि/शायर अशोक कुमार 'नीरद' के हाल ही में प्रकाशित ग़ज़ल संग्रह "अंकुर बोलते हैं" ने। यह...