भूपेन हज़ारिका याद हैं? जिन्होंने हुंकार लगाई थी
रुचिर गर्ग " ओ गंगा तुम ओ गंगा बहती हो क्यूं ? " पूरा सुनिए, फिर से सुनिए,फिर फिर सुनिए।...
रुचिर गर्ग " ओ गंगा तुम ओ गंगा बहती हो क्यूं ? " पूरा सुनिए, फिर से सुनिए,फिर फिर सुनिए।...
(पोस्ट काफी लंबी है, इच्छुक पाठक कृपया फुरसत से और इत्मीनान से पढ़िए) उद्घोषक - मूल कार्यक्रम प्रारंभ करने के...
प्रगतिशील आलोचना हमेशा अपने समय के संकटो,चुनौतियों का सामना करती रही है। स्वतंत्रता पूर्व उसने सामन्तवादी-पूंजीवादी मूल्यों के साथ-साथ साम्राज्यवाद...
साहित्य - कला- संस्कृति ♦ फोटो एवं प्रस्तुति : सिद्धेश्वर °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°° "दिल का बोझ न बढ़ जाए,हम अरमान कम रखते...
बस मुग्ध हूँ, नम हैं आँखें… लेखन पर मुग्ध और उर्मिला की पीड़ा के सटीक बयान पर नम हैं आँखें....
डॉ सुधीर शर्मा छेरछेरा छत्तीसगढ़ का लोक तिहार है। यह लोक को धर्म, अध्यात्म, इतिहास और संस्कृति से जोड़ता है।...
तुम जल्दी ही सबके सम्मुख अपनी अपूर्ण संपूर्णता में उपस्थित होंगी। सबकी शुभकामनाओं के लिए, प्रेम, अपनत्व और आलोचनाओं के...
मनरेगा कार्य समुदाय के लिए परती भूमि का विकास कार्य में संलग्न मनरेगा मजदूरों के द्वारा छेरिक-छेरा पर्व मनाया गया,...
मेरे पड़ोस की एक प्यारी सी लड़की सन्नो;(शोभा) चिड़िया सी इस आंगन से उस आंगन फुदकने वाली,बेहद मीठी आवाज़ जब...
वरिष्ठ कथाकार शुभदा मिश्र का कहानी संग्रह 'संदेशो इतना कहियो जाय' में 1978 से लेकर 2014 तक की दीर्घ अंतराल...