April 24, 2026

आलेख

आज के अतीत : सहजता का सौंदर्य

भीष्म साहनी जी बीसवीं शताब्दी के हिंदी के महत्वपूर्ण कथाकार और उपन्यासकार हैं. उनकी कहानियां, उपन्यास और नाटक अपने समय...

फ़िल्म ‘स्वामी’ : बासु चटर्जी (1977)

मनुष्य का जीवन द्वंद्वों से घिरा होता है।इन द्वंद्वों से मुक्ति बहुधा आसान नहीं होतीं। हमारे बहुत से निर्णय परिस्थिति...

हिन्दी की पिता पर केंद्रित एक कविता अंग्रेजी अनुवाद सहित

पिता का अस्तित्व ---उषा किरण,लब्धप्रतिष्ठ एवं ख्याति प्राप्त कवयित्री।पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रचनाएँ प्रकाशित।पटना, बिहार। हर दिन उबड़खाबड़ पगडंडी पर दौड़ती-...

तुलसीदास फिर बहुत ज्यादा चर्चा में……

इन दिनों तुलसीदास फिर बहुत ज्यादा चर्चा में हैं। वैसे जब वे चर्चा में नहीं रहते तब भी लोकजीवन में...

छत्तीसगढ़ की सबसे ऊंची चोटी से अब पर्यटकों को मिलेगा प्रकृति का प्यार

छत्तीसगढ़ के उत्तरी छोर पर स्थित सबसे ऊंची चोटी गौरलाटा पर्यटन के लिहाज से अविश्वसनीय स्थान है। स्थानीय स्तर पर...

दाऊ रामचन्द्र देशमुख: कुछ अनछुए आत्मीय प्रसंग

आम तौर पर किसी रचनाकार या सृजनशील व्यक्ति के बारे में जब सोचा जाता है तब यह मान लिया जाता...

भूपेन हज़ारिका याद हैं? जिन्होंने हुंकार लगाई थी

रुचिर गर्ग " ओ गंगा तुम ओ गंगा बहती हो क्यूं ? " पूरा सुनिए, फिर से सुनिए,फिर फिर सुनिए।...

सुरता चंदैनी गोंदा – 1, “दाऊ रामचंद्र देशमुख के चंदैनी-गोंदा की कथावस्तु”

(पोस्ट काफी लंबी है, इच्छुक पाठक कृपया फुरसत से और इत्मीनान से पढ़िए) उद्घोषक - मूल कार्यक्रम प्रारंभ करने के...

आलोचक राजेश्वर सक्सेना और हमारा समय

प्रगतिशील आलोचना हमेशा अपने समय के संकटो,चुनौतियों का सामना करती रही है। स्वतंत्रता पूर्व उसने सामन्तवादी-पूंजीवादी मूल्यों के साथ-साथ साम्राज्यवाद...

अंतरराष्ट्रीय हिंदी साहित्य परिषद की यादगार काव्य संध्या

साहित्य - कला- संस्कृति ♦ फोटो एवं प्रस्तुति : सिद्धेश्वर °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°° "दिल का बोझ न बढ़ जाए,हम अरमान कम रखते...