April 24, 2026

Uncategorized

आधे-अधूरे : पूर्णता की तलाश बेमानी है

मोहन राकेश जी का यह नाटक अपने पहले मंचन(1969) से ही चर्चित रहा है.तब से अब तक अलग-अलग निर्देशकों और...

मेरी ज़मीन मेरा सफ़र :ज़ज़्बात की शायरी

शायरी की परंपरा बहुत पुरानी है और काफी मथी जा चुकी है।फ़ारसी-उर्दू-हिंदी की यह परम्परा मुसलसल जारी है, और लोकप्रिय...

डॉ. सुधीर शर्मा को अंतरराष्ट्रीय प्रेमचंद सम्मान

भारतीय नार्वेजीय सूचना एवं सांस्कृतिक फोरम नार्वे और स्पाइल दर्पण पत्रिका नार्वे के संयुक्त तत्वावधान में मुंशी प्रेमचंद जयंती के...

कुनबे का एक सूर्य अपनी रौशनी बुझा गये…

कुनबे का एक सूर्य अपनी रौशनी बुझा गये , सभी परिवार वालों को वो बेसबब रुला गये । कहां गये...

जापानी का गद्य काव्य हाइबन विधा

हाइबन विधा हाइकु,तांका, सेदोका और चोका विधा की ही तरह एक जापानी विधा है। इसके बारे में विस्तृत जानकारी निम्नानुसार...