April 3, 2025

समीक्षा

समीक्षा नहीं, एक दर्शक की प्रतिक्रिया, नाटक ‘सम्राट अशोक’ मंच पर

विनोद रस्तोगी जन्मशती वर्ष के अवसर पर संस्कृति मंत्रालय नई दिल्ली के सहयोग से विनोद रस्तोगी स्मृति संस्थान द्वारा आयोजित...

के. पी. अनमोल को प्रयोगधर्मी ग़ज़लकार कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी

*– सोनिया वर्मा* आप छोटे हों या बड़े, मेहनत, लगन और निरंतर अभ्यास से ही क़ामयाबी मिलती है। सतत प्रयत्न...

फ़िल्म काबुलीवाला : बिमल राय, हेमेन गुप्ता(1961)

प्रेम और सम्वेदना मनुष्य की सहजवृत्ति हैं। हमारा संवेदनात्मक लगाव केवल 'अपनों' से नहीं अपितु 'दूसरों' से भी हो सकता...

समीक्षा : पुस्तक “आगे से फटा जूता’

o अंजनी श्रीवास्तव (M)9819343822 "भावनाओं, संवेदनाओं और दार्शनिकता का सम्मिश्रण"-..."आगे से फटा जूता"- आपको सड़क के किनारे और कूड़े करकट...

फ़िल्म ‘सद्गति’ : सत्यजीत राय(1981)

प्रेमचंद तत्कालीन समाज के कुशल चितेरे हैं। वे समाज के अंतर्विरोधों, विडम्बनाओं से आँख नही चुराते बल्कि जोखिम की हद...

सुरेशचन्द्र शुक्ल विदेश में महात्मा गाँधी की पत्रकारिता के संवाहक – प्रो. शैलेन्द्र कुमार शर्मा

नार्वे से डिजिटल अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी और कविसम्मेलन में प्रसिद्ध समालोचक और मुख्य अतिथि शैलेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि सुरेशचन्द्र...

रमण की आंखों से झलकती है कविता -प्रो वाजपेयी

टैगोर और नवीन के परंपरा के कवि हैं किरण-तिवारी कबूतरी बहुत सुंदर थी की समीक्षा गोष्ठी का आयोजन बिलासपुर। छत्तीसगढ़...