March 5, 2026

समीक्षा

प्रेम गीतों के गहन साधक आनंद बक्शी

किताब समीक्षा 0 रमेश कुमार ‘रिपु’ अच्छे नग्में लिखने का कोई मौसम नहीं होता। कोरे कागज पर जज्बात के उतर...

कवि बसंत त्रिपाठी का चौथा काव्य संग्रह ‘नागरिक समाज’

'मौजूदा हालात को देखते हुए' 'सहसा कुछ नहीं होता' 'उत्सव की समाप्ति के बाद' ये तीन काव्य संग्रह के बाद...

समीक्षा : प्रेम की 57 कविताएँ

रचनाकार: प्रेमसिंह राजावत 'प्रेम' विधा: काव्य प्रकाशक: राष्ट्रभाषा प्रिंटिंग प्रेस (आगरा) मूल्य: 150/- पृष्ठ: 72 कविता कवि के मनभावों को...

समीक्षा नहीं, एक दर्शक की प्रतिक्रिया, नाटक ‘सम्राट अशोक’ मंच पर

विनोद रस्तोगी जन्मशती वर्ष के अवसर पर संस्कृति मंत्रालय नई दिल्ली के सहयोग से विनोद रस्तोगी स्मृति संस्थान द्वारा आयोजित...

के. पी. अनमोल को प्रयोगधर्मी ग़ज़लकार कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी

*– सोनिया वर्मा* आप छोटे हों या बड़े, मेहनत, लगन और निरंतर अभ्यास से ही क़ामयाबी मिलती है। सतत प्रयत्न...

फ़िल्म काबुलीवाला : बिमल राय, हेमेन गुप्ता(1961)

प्रेम और सम्वेदना मनुष्य की सहजवृत्ति हैं। हमारा संवेदनात्मक लगाव केवल 'अपनों' से नहीं अपितु 'दूसरों' से भी हो सकता...

समीक्षा : पुस्तक “आगे से फटा जूता’

o अंजनी श्रीवास्तव (M)9819343822 "भावनाओं, संवेदनाओं और दार्शनिकता का सम्मिश्रण"-..."आगे से फटा जूता"- आपको सड़क के किनारे और कूड़े करकट...

फ़िल्म ‘सद्गति’ : सत्यजीत राय(1981)

प्रेमचंद तत्कालीन समाज के कुशल चितेरे हैं। वे समाज के अंतर्विरोधों, विडम्बनाओं से आँख नही चुराते बल्कि जोखिम की हद...