प्रकृति-सौंदर्य के कुशल चितेरे, छायावाद के प्रमुख स्तंभ कवि सुमित्रानंदन पंत की जयंती पर
कुछ अरुण-दोहे : पतझर जैसा हो गया, जब ऋतुराज वसंत।अरुण! भला कैसे बने, अब कवि कोई पंत।। वृक्ष कटे छाया...
कुछ अरुण-दोहे : पतझर जैसा हो गया, जब ऋतुराज वसंत।अरुण! भला कैसे बने, अब कवि कोई पंत।। वृक्ष कटे छाया...
दहलीज़ एक दहलीज़ पार करदूसरी दहलीज़ की शोभाबढ़ाती हैं..ये लड़कियां थोड़ा सालाड़ पाते ही..खिलखिलाती हैं। मायके में शुभ कार्यों में..जब...
प्राचीन काल से ही गाड़ा को छत्तीसगढ़ मे एक महत्वपूर्ण ट्रान्सपोर्ट के रूप मे प्रयोग किया जाता रहा है। इसे...
किताब के समान खुलेंगींयदि आपके घर की खिड़कियांतो अन्य दिनों सेकुछ भिन्न होगा बाहर का दृश्य खिड़की के समान खुलने...
मत करना तुम यह नादानी।।कभी न फ्रिज का पीना पानी।। बार-बार अब छींक सताये।नाक बहुत बहती ही जाये।। दुख देता...
पढ़ा जा रहा न लिखा जा रहा हैलिखा था कभी वो मिटा जा रहा है सुना जा रहा न कहा...
मैं सलमान रूश्दी की किताब 'इमेजनरी होमलैंड्स' में एडवर्ड सईद से उनकी एक बातचीत पढ़ रहा था। सलमान इस्लाम के...
बेटे ने लाख चाहा था, पाई न दे सकापापा के हाथ पहली कमाई न दे सका परबत की थी उम्मीद,...
कविता में भी घुसे हुए हैंशब्दों के व्यापारीचला रहे हैं खाल ओढ़करअपनी दुकानदारी संपादक हैं ,आयोजक हैंइनमें हैं कुछ नेताढूँढा...
लेखक- इन्द्रा राठौर नई सदी की हिंदी कविता में 'स्त्री कविता' अपने पीले पड़ चुके रूदाली चेहरे के बनिस्बत और...