October 22, 2026

साहित्य

सर्कस, द्रोण और डोली :विवाह के बदलते स्वरूप

राजेन्द्र उपाध्यापय हाल ही में सूरत में एक शादी में जाने का मौका मिला। वहां बारात के ऊपर चलती सड़क...

डॉ. किरण मिश्रा की दो कविताएं

समागम के मूलतत्व जीवन का ब्रहांड बनता बिगड़ता है तेरे मेरे गुरुत्वाकर्षण से जैसे गुजरता है जीवन अनेक चक्रों से...

अनार्याणां प्रवेश: निषिद्ध

सुशांत सुप्रिय पंडित ओंकारनाथ संस्कृत के प्रकाण्ड विद्वान थे । लोग उनके पांडित्य का लोहा मानते थे । पांडित्य उन्हें...

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