सारंगढ़ के चावल और हैदराबाद की बिरयानी
डॉ. परिवेश मिश्रा साल 1946 के शुरूआती तीन महिनों में सारंगढ़ राज्य के हर गांव में ढेंकियों की आवाज़ गूंज...
डॉ. परिवेश मिश्रा साल 1946 के शुरूआती तीन महिनों में सारंगढ़ राज्य के हर गांव में ढेंकियों की आवाज़ गूंज...
कुछ दिनों पूर्व अपने गृह ग्राम बागबहारा (छत्तीसगढ़) में था, वहाँ से लगभग ९० किलोमीटर की दूरी पर प्रसिद्ध तीर्थ...
तुम्हारी दौड़ अलकनंदा की तरह है मेरे बच्चे! तुम्हारी चाल गंगा की तरह है मेरे बच्चे! तुमसे मिला सुख महानदी...
व्यंग्यकार त्रिभुवन पाण्डेय देश की सबसे चौड़ी नदी ‘महानदी’ छत्तीसगढ़ में है. धमतरी से अस्सी किलोमीटर दूर सिहावा की पहाड़ियों...
डाॅ. नरेंद्र देव वर्मा कृत "सुबह की तलाश" एक विशिष्ट उपन्यास है जिस पर पर्याप्त चर्चा नहीं हुई । छत्तीसगढ़ी...
प्रायः देखा जाता है लोगों का कौतूहल नदी,झरनों,धार्मिक स्थल, जंगल अथवा पहाड़ी क्षेत्रों में किसी विशेष अवसर पर देखने को...
देह से देह विलग हो तो भी कामना जुड़ी रहे ज्यों कोई सलोना सयुंक्ताक्षर हर नवेली कोशिका को फिर फिर...
सन 2015 के अंतिम महीनों की बात है शायद सितम्बर या अक्टूबर रहा होगा। मैं उन दिनों भोपाल में ही...
हमारे शरीर में आंखें होती हैं ठीक उसी तरह जिस तरह किसी मकान में खिड़कियां होती हैं अर्थात खिड़कियां किसी...
अपनी खिड़की के कांच में जमी धुंध पर कभी लिखा था तुमने उंगलियों से मेरा नाम वह धुंध लौट आई...