मैंने कब कहा…
मैंने कब कहा कोई मेरे साथ चले चाहा जरुर! अक्सर दरख़्तों के लिए जूते सिलवा लाया और उनके पास खड़ा...
मैंने कब कहा कोई मेरे साथ चले चाहा जरुर! अक्सर दरख़्तों के लिए जूते सिलवा लाया और उनके पास खड़ा...
कविता रोज लिखते हैं मन में आए इतना लिखते हैं लेकिन क्या सच में हम कविता लिखते हैं। बहुत दिनों...
जीवन के सफर मे पक्के, चमचमाते रास्ते कम ही मिलते है ! अक्सर मिलती है अजनबी पगडंडियाँ उबड़- खाबड़ सी.....
ज़िन्दगी बेवफ़ा होगी, नया सफ़र शुरू होगा, मर के भी हमको कभी शिकवा ना होगा। इस जहां से ज़्यादा ख़ूबसूरत...
सदका उनका भी कुछ यूँ ही उतारा जाए दुश्मनों को भी मुहब्बत से ही मारा जाए तख़्त और ताज उनके...
कभी-कभी भारत माता घबराती है गद्दारों की संख्या बढ़ती जाती है आतंकवाद की हम सब निंदा करते हैं लेकिन कुछ...
मधुकर अब तक नहीं लौटा आ कर यात्रा वृत्तांत सुनाने; दृश्य दिखाने पहलगाम का यात्री का दशा हाल बताने। सुना...
सच विजय वर्तमान जो मैंने देखा वह कितना सच है पता नहीं । जो मैंने सुना उसके सच होने की...
जिसने मेरा घर जलाया उसे इतना बड़ा घर देना कि बाहर निकलने को चले पर निकल न पाए जिसने मुझे...
आरती शर्मा द्वारा रचित कविता संग्रह की समीक्षा —------------------------------------------------ समीक्षक : डॉ किशोर अग्रवाल रीमा दीवान चड्ढा ने बहुत ही...