September 6, 2026

कविता

यशस्वी गीतकार कवि दादा श्री नारायण लाल परमार …

हमारे शरीर में आंखें होती हैं ठीक उसी तरह जिस तरह किसी मकान में खिड़‌कियां होती हैं अर्थात खिड़‌कियां किसी...

क्यूँ ही देखी भाली दुनिया

क्यूँ ही देखी भाली दुनिया है कितनी जंजाली दुनिया बेसुध सा कर के रखती है ख़ुसरो की क़व्वाली दुनिया अपना...