मुसाफिर चांद
रात के मुसाफिर चांद, तू भी तन्हा तन्हा , चल रहा है शायद मेरी तरह, सितारों जड़ा ये गगन, जगमगाते...
रात के मुसाफिर चांद, तू भी तन्हा तन्हा , चल रहा है शायद मेरी तरह, सितारों जड़ा ये गगन, जगमगाते...
तुम्हारी दौड़ अलकनंदा की तरह है मेरे बच्चे! तुम्हारी चाल गंगा की तरह है मेरे बच्चे! तुमसे मिला सुख महानदी...
देह से देह विलग हो तो भी कामना जुड़ी रहे ज्यों कोई सलोना सयुंक्ताक्षर हर नवेली कोशिका को फिर फिर...
हमारे शरीर में आंखें होती हैं ठीक उसी तरह जिस तरह किसी मकान में खिड़कियां होती हैं अर्थात खिड़कियां किसी...
अपनी खिड़की के कांच में जमी धुंध पर कभी लिखा था तुमने उंगलियों से मेरा नाम वह धुंध लौट आई...
क्यूँ ही देखी भाली दुनिया है कितनी जंजाली दुनिया बेसुध सा कर के रखती है ख़ुसरो की क़व्वाली दुनिया अपना...
अतीत के फफोले, मरहम तुम। अध्याय दुख के सहारा तुम। तपस्या उम्रभर की, वरदान तुम। बैचेनियाॅं इस दिल की, राहत...
वोह ९० के दशक वाला दिल जिसमें मां - बाबा का डर था पर सपनों का भी एक घर था...
पूस मास में धरा ठिठुरती, दिखा कुहासा गहरा । धूप नहीं है कहीं दूर तक, लगा सूर्य पर पहरा। खगदल...
ग़ज़ल में फ़न, तख़य्युल, लफ़्ज़, लहजा कौन देखेगा जहाँ सब बेसलीक़ा हों सलीक़ा कौन देखेगा किसे है कारोबारे ज़ीस्त से...