तेरे बिन भी तो गुज़रता है ज़माना मेरा…
तेरे बिन भी तो गुज़रता है ज़माना मेरा, मगर अच्छा नहीं लगता है गुज़र जाना मेरा। तूने पूछा ही नहीं...
तेरे बिन भी तो गुज़रता है ज़माना मेरा, मगर अच्छा नहीं लगता है गुज़र जाना मेरा। तूने पूछा ही नहीं...
सावन ने प्रेम लिखा है, हर पत्ती के हरे अधर पर। बादल ने संदेश सुनाया, भीगी-भीगी हर डगर पर॥ महुए...
आपके ख़त को हम ख़बर बताए बैठे हैं, आपके साये को भी हम घर बताए बैठे हैं। कब मिले थे...
सुन री, ज़िंदगी! हर बात पर, हर रोज़, हर किसी से समझौता करूँ? ये शर्तें मुझे मंजूर नहीं। मैं वो...
है सुकूं का सबब मैकदे की ज़मीं कम मगर जादु-ए-आशिकी भी नहीं आशिकों ने जवां हुस्न को यूँ रखा उम्र...
मेरा ही ज़िक्र उसके लबों पर सदा रहे जो शख़्स मेरा हो वो फ़क़त बस मेरा रहे सातों वचन में...
सुबह उठा तो दरवाज़े पर एक चींटी मरी पड़ी थी। उसे उठाया नहीं क्योंकि दफ़नाने की जगह नहीं थी। चाय...
भावना के मौन,मन की शून्यता पर, कल्पना के आवरण कब तक चढ़ाऊँ? गीत ! तुमको ओढ़नी कब तक ओढ़ाऊँ ?...
दुनिया की सबसे पुरानी समस्या क्या है? वह समस्या जो कभी नई नहीं हुई फिर भी रोज़ नई लगती है।...
रात हुई तो इन आँखों में, जगमग - जगमग तारे आए। दिन में जिनको भूल चुका था! याद मुझे वो...