नज़्म: हमनवां की नासमझी
रचनाकार: डॉ. निवेदिता बांदिल दिनांक: 11/04/2026 मैने अभी कुछ कहा भी नहीं था कि तुम समझ लेते हो, मैने अभी...
रचनाकार: डॉ. निवेदिता बांदिल दिनांक: 11/04/2026 मैने अभी कुछ कहा भी नहीं था कि तुम समझ लेते हो, मैने अभी...
ग़ज़ल बड़े बड़ों को ये शायद पता नहीं होता किसी को मार के कोई बड़ा नहीं होता ---------- पुकारो दिल...
हमें साथ-साथ शोधित होना था हमें साथ- साथ क्रोधित होना था लेकिन तुम गृहस्थी में मारी गयी और मैं नौकरी...
भाजी बोहार के। राँध भूंज बघार के।। दे लसुन मिर्चा के फोरन। छीटा मार मही दार के।। तन मन ला...
पर जानती हूं उस देश को जहां मेरा बेटा रहता है जानती हूं उस देश को जहां स्कूल के अहाते...
(रचनाकार:निवेदिता बांदिल) तिथि: 08/03/2026 राम ने मार दिया था रावण को, फिर रावण क्यों नहीं मरता है? हर युग में...
पृथ्वी घूम रही है अपनी धुरी पर पिछले कई हज़ार वर्षों से। समुद्र हैं, इतने ही खारे लेकिन समुद्र में...
छत्तीसगढ़ी के ठेठ देहाती कवि डाँ.बलदेव:- लइका पढ़ई के सुघ्घर करत हवँव मैं काम कोदूराम दलित हवय मोर गंवइहा नाम...
मिट्टी की देहरी पर सिमटी-सी भोर है, अंगारों की लौ में जीवन की डोर है। नन्हीं हथेलियों में दिन का...
तुम देखो ऐसे कि सुर्ख़ लाल रंग हो जाऊँ, चढ़े कोई भी रंग मगर तेरे रंग में खो जाऊँ। भांग...