क्यूँ ही देखी भाली दुनिया
क्यूँ ही देखी भाली दुनिया है कितनी जंजाली दुनिया बेसुध सा कर के रखती है ख़ुसरो की क़व्वाली दुनिया अपना...
क्यूँ ही देखी भाली दुनिया है कितनी जंजाली दुनिया बेसुध सा कर के रखती है ख़ुसरो की क़व्वाली दुनिया अपना...
अतीत के फफोले, मरहम तुम। अध्याय दुख के सहारा तुम। तपस्या उम्रभर की, वरदान तुम। बैचेनियाॅं इस दिल की, राहत...
वोह ९० के दशक वाला दिल जिसमें मां - बाबा का डर था पर सपनों का भी एक घर था...
पूस मास में धरा ठिठुरती, दिखा कुहासा गहरा । धूप नहीं है कहीं दूर तक, लगा सूर्य पर पहरा। खगदल...
ग़ज़ल में फ़न, तख़य्युल, लफ़्ज़, लहजा कौन देखेगा जहाँ सब बेसलीक़ा हों सलीक़ा कौन देखेगा किसे है कारोबारे ज़ीस्त से...
श्वेत साया मंद गति से रेंगता कुंज गलियों में उसके वीरान चेहरे पर दिखाई देता हैं अंतहीन शोक बिन पादुका...
ये दिन गुज़र रहे हैं या हम गुज़र रहे हैं आधी है हर कहानी किरदार मर रहे हैं ख़ुशबू के...
मात्राबद्ध रचना ही है। इसलिए सभी विद्वानों से आग्रह है कि कृपया विषय का आस्वादन करें मात्रिक छंद के प्रकार...
सभी विद्वान मनीषी साहित्य रसिकों के लिए एक ग़ज़ल प्रस्तुत है। पहले के ज़माने में तो अख़बार नहीं थे। लेकिन...
जो तुमसे नैन हटा पाए तो चन्द्रमा भी देख लेंगे, संग तुम्हारे रातें होंगी, और दिन भी देख लेंगे। तेरी...