मेरे बालगीत संग्रह – सारा जहां हमारा है
चित्रांकन :- डा. सुनीता वर्मा। झूले में दीदी-भइया आओ ना मम्मी-पापा आओ ना मैं बैठी हूं झूले में आकर जरा...
चित्रांकन :- डा. सुनीता वर्मा। झूले में दीदी-भइया आओ ना मम्मी-पापा आओ ना मैं बैठी हूं झूले में आकर जरा...
मांतगे हे धनहा म धान बड़ मगन हे किसान उत्ती ले सुरूज हा लावत हे बिहान बबा हा मुसुर मुसुर...
सखियों! घर के पर्दे, सोफा कवर तो बदलोगी ना अपने सोचने का तरीका भी बदल देना दीयों को जब तेल...
(बाल दिवस की बधाई! बच्चे ही बनाएंगे देश को और बेहतर...) इस अराजक दौर में विश्वास हैं बच्चे आस्थाओं के...
वो कहते हैं क्या लिखती हो हंसकर इतना कह देती हूँ । माँ की लोरी, पापा का लाड़ दादी-नानी भी...
जिसने माटी से दीप बनाये जिसने कच्ची घानी से कडु तेल निकाला जिसने खेत में पसीना बहाके उगाया कपास बाती...
कहने सुनने वाली भाषा, शान मर्यादा रखती है। केवल कहने सुनने से जो, दुख भी आधा करती है। बातचीत ऐसा...
हँसने वाला और हँसेगा इससे ज़्यादा क्या होगा मेरा ग़ुस्सा और बढ़ेगा इससे ज़्यादा क्या होगा पानी मेरे शहर तलक...
कश्तियां मझधार में हैं नाख़ुदा कोई नहीं अपनी हिम्मत के अलावा आसरा कोई नहीं शोहरतों ने उस बुलंदी पर हमें...
रख देना चाहती हूं तुम्हारी हथेलियां पर इसके तारे इसका चांद इसके बादल इसका सूरज भर देना चाहती हूं तुम्हारी...