बड़ी आसानी से तुमने तोड़ दिया
जो तिनका-तिनका जज्बातों से बनाया था एक आशियाना हमने अपना ...... एक तूफ़ान से तुम भी गुजरे और एक तूफ़ान...
जो तिनका-तिनका जज्बातों से बनाया था एक आशियाना हमने अपना ...... एक तूफ़ान से तुम भी गुजरे और एक तूफ़ान...
अंतरराष्ट्रीय अनुवाद दिवस के निमित्त मराठी कवयित्री बहिणाबाई चौधरी(१८८०-१९५१) की कविता का हिंदी अनुवाद- छिपी भाग की रेखा छिपी भाग...
ख़त्म फूलों की निशानी हो रही है ख़ूब अच्छी बाग़बानी हो रही है! क्यों नहीं मातम हो बकरे के घरों...
न जाने कितने ही लोगों को इस बरस भी खाने पर बुलाना रह गया और न जाने कितने ही लोग...
मेघ ! तुम इतना बरसते हो भिगो देते हो धरती के अंग अंग को अपने जल से सराबोर कर देते...
कविता - एक ------- चेहरे नहीं धड़कनें तैरती हैं आँखों में प्यार में ****** कविता - दो ------ रहो कहीं...
का बिहनिया का संझा, रहि रहि रस्ता देखे जा , भइया आवत होही का , भेजे होही दाई हा ।...
फ्रेंच कविताओं की अनुवाद शृंखला में योजना रावत ने कवि जेम्स साक्रे की कविताओं का अनुवाद किया है। कवि परिचय...
डाकुओं ने उसे कुछ दिन नहीं वर्षों तक अपने साथ रखा फिर भी डाकू न बना सके विष न भर...
बस, तुम ही तो हो जो उत्ताल लहरों- सी उछलती समंदर की श्वेत बालू पर मेरे बदन से लिपट जाती...