मेरी नवीनतम कविता : यौवन मेरा लापता हो गया
कहीं यौवन तो मेरा लापता हो गया कोई चुरा ले गया कि खुद खो गया सब कहते हैं बड़ा ही...
कहीं यौवन तो मेरा लापता हो गया कोई चुरा ले गया कि खुद खो गया सब कहते हैं बड़ा ही...
देश के सुप्रसिद्ध भाषाशास्त्री,व्याकरणाचार्य पिताश्री स्वर्गीय श्री मोतीलाल विजयवर्गीय जी का जन्मदिवस आज 9 सितंबर को इस प्रण के साथ...
रूह में बसी मुहब्बत, महक फ़िज़ा में, आती तुमसे होकर, छूकर तुमको ये पुरवाई। महसूस कराती, इश्क़ की रंगत, छितरे...
काग़ज़ की नाव थी तुमने जो भेजी थी मेरे लिए,,, अच्छा हुआ तुमने पानी पर, पानी से बनाया था आशियाना,...
वक्त बदल जाता बहुत, सब दिन नहीं समान। शेष समय जरूर करो, तुम पूरे अरमान। मुखिया मुख सो चाहिए, तुलसी...
इंतज़ार तुम्हारा किया पल पल जब तब था बस इतना ही ख़याल क्या इंतज़ार किया था तुमने भी,,, तुम्हारे लम्स...
तुम नहीं हो मगर तुम्हारी तस्वीरें है बेशुमार मेरे इस एक बित्ते से मोबाइल में तुम्हारी अनुपस्थिति में रात के...
क्या आपने कभी धूप को देखा ? अगर इसे सवाल की तरह आप पढ़ रहे हों तो उत्तर को ही...
सुख उन्हें भी कब मिला है पर पिता ने यह लिखा है देख तू चिंता न करना इस समय धीरज...
प्रभु प्रेम बरसता ऐसे जैसे बादल से पानी कोयल की कूक सुनो तो बोलो मीठी वाणी | खुशबू बिखराती हवा...