ग़ज़ल
1 जब अरमान फलेगा तो। मन के साथ चलेगा तो। आँखें जी भर सो लेगी, सूरज, शाम ढलेगा तो ।...
1 जब अरमान फलेगा तो। मन के साथ चलेगा तो। आँखें जी भर सो लेगी, सूरज, शाम ढलेगा तो ।...
-छत्तीसगढ़ लोक लोक शैली में गांधी के कार्य को याद करते हुए द्वारिकाप्रसाद 'विप्र' लिखते हैं- ●'देवता बनके आये गांधी...
भाव की बहती धराएँ, दे रहीं हमको किनारा मैं पथिक हूँ गीत का अरु, गीत ही अंतिम सहारा।। सुरसरि में...
कोई फकीर , बन राहगीर, नर्मदा तीर, हिम सा शरीर, वह परम वीर, भू चला चीर, गर्जन अधीर, कहता समीर...
कुछ दिन पूर्व कॉलोनी के मुख्य गेट पर विजित शर्मा के नाम का एक बड़ा सा सचित्र बैनर लगा था।...
अंबर में जब बदली छायी,याद तुम्हारी आई। टप -टप टपके सावन छत से, गीत सुना ना पाई। घूम रहे आँगन...
शीर्षक - धूल उड़ाती गाड़ियों के बीच विधा - कविता परिचय - ज्ञानीचोर शोधार्थी व कवि साहित्यकार मु.पो. रघुनाथगढ़, सीकर...
प्रथम किरण ले दिनकर आए, सहर प्रथम पहर जग मुस्कुराए। लालिमा नील अम्बर पर छाए। सुनहरा वातवरण मन गुनगुनाए। धीमा...
क ख ग घ पुनः पढ़ा दो स्कूलों की सैर करा दो हंसते गाते पढ़ने जाएं पहली की कक्षा लगवा...
ये तुम्हारी उलफ़त का तिलिस्म नहीं तो और क्या है? तुम्हारे हसीं चेहरे को देखा करूं... तुम्हारे लबों को चूम...