अब जाग रहे हैं…
मीठे भ्रमित राहों से जकड़े हुये बाहों से दूर जल्दी भाग रहे हैं अच्छा है कि जाग रहे हैं। सच...
मीठे भ्रमित राहों से जकड़े हुये बाहों से दूर जल्दी भाग रहे हैं अच्छा है कि जाग रहे हैं। सच...
कहते हैं आजादी अधिकार है सबका लेकिन इसका प्रयोग करना कहाँ जानते हैं सब? जैसे आदत होती है कुछ पशुओं...
खुश अब देश है । खुशी भी दी तो स्त्रियों ने अपनी बूते , अपनी मेहनत और लगन से ।...
हम क्या थे और क्या हो गए जीने के अब सारे- अर्थ ही खो गए सोचें हम क्या थे और...
अंडा कस महतारी हर सेवत हे छाती ले चिपका के साँसे म सेवत हे बुढ़वा, बचपन ल खोजत हे दाई...
बरसे बादरिया झूम-झूम , हरसे हियरा छाये उमंग । धरती गाये गीत पवन संग, चहकें चिड़िया अति प्रसन्न। सब ओर...
कलकत्ते में कभी जंगल भी थे पेड़ भी थे विशाल पौधे भी थे औषधियो के सांप भी थे बिच्छूभी थे...
विनाश विनाश करना है लेकिन कहना है विकास करना है तर्ज़ भी बता दो माडल भी दिखा दो जिस पर...
एक शहतूत का पेड़ है जिसकी शाखें ढँकने लगी हैं खिड़की का द्वार कभी-कभी सोचती हूँ शाख़ें क्यों नहीं लिपट...
मौसम नहीं बदलता है दिन-रात बदलते हैं चारों ओर वही आतप है, गहरा सन्नाटा वही गरीबी जीवन में घर में...