तुम मेरी हो… हिंदी
तुम्हारे साथ, अहा .! सुखद अलौकिक अनुभूति, तुम सपनों में नित आती -जाती, घुंघराले- घुंघराले अक्षरों में, कोरे कागज पर...
तुम्हारे साथ, अहा .! सुखद अलौकिक अनुभूति, तुम सपनों में नित आती -जाती, घुंघराले- घुंघराले अक्षरों में, कोरे कागज पर...
झुरमुटों के बीच पड़ा हुआ बालपंछी, टकटकी लगाए निहारता घोंसले को । ढूँढती हुई निगाहें उसकी इधर-उधर, माँ किधर तोड़ा...
हम सबने,एक चादर ओढ़ रखी है, चादर के हटते ही यदाकदा, झीनी-झीनी सी तस्वीर सामने आती है । बड़ी शिद्दत...
- गौरव मैं प्रार्थना की भाषा में तुम्हारी हथेलियों को स्पर्श करता हूँ और पाता हूँ कि नियति ने उस...
जब बहन को विदा किया वह दूर किसी शहर चली गई घर बसाने कितना रोई थी रोते हुए देर तक...
- रूपम मिश्र शरद अनगिनत रंग के फूलों को लेकर आ रहा है अबकी भी तुम्हारे मखमुलहे मन को देखकर...
हिन्दी साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत मेरे ग़ज़ल संग्रह फल खाए शजर से यह ग़ज़ल प्रस्तुत है-- बहर - बहरे मुतक़ारिब...
द्रोपती का चीर हो गई आज की रात कुचले हुए आन्दोलन के मंच जैसा सन्नाटा जो घड़ी की टिक-टिक से...
अलका अग्रवाल जब मैं कलम बन गई, कागज की अनुचरी बन गई l बेतरतीब शब्दों की तब मैं सशक्त, लय-ताल...
मोहब्बत में इतने सारे सवाल क्यों हैं, इसे लेकर जमाने में बवाल क्यों है। शोर वरपा है इश्क के मारों...