ग़ज़ल
ग़ज़ल ...... ❗1❗ स्वयं के भी विरुद्ध हिन्दी को , लड़ना पड़ता है युद्ध हिन्दी को । दिल पे इमला...
ग़ज़ल ...... ❗1❗ स्वयं के भी विरुद्ध हिन्दी को , लड़ना पड़ता है युद्ध हिन्दी को । दिल पे इमला...
आम का अचार नही बना इस बार सरसों के तेल पर मंहगाई की मार लंबे हुए रास्ते भारी हुए रिश्तेदार...
राधा के श्याम की नहीं,मुझे तो, मीरा के कृष्ण की तलाश थी। प्रेम भी उपासना भी, उस प्रेम की आस...
धूप और छाँव ये मेरा गाँव, तालों पर चलता, ये डगमग नाँव, बरगद का पेड़, तालों का किनारा, शाम जहाँ...
2) केवल दो गीत लिखे मैंने। इक गीत तुम्हारे मिलने का इक गीत तुम्हारे खोने का। सड़कों-सड़कों, शहरों-शहरों नदियों-नदियों, लहरों-लहरों...
हम बच्चों को तिरंगे का तीन रंग के बारे में बताया जाता है पढ़ाया जाता है समझाया जाता है दिखाया...
उखाड़ा नहीं जड़ से, काट दिया धड़ से| परिवार बिखर गया, अब कौन किधर गया| जमाने से पोसता रहा, साथ...
बूढ़ी हो जाती है धीरे-धीरे छुपा देती है अपनी अल्हड़ता शहतूत की किसी टहनी पर बूढ़ी होती स्त्री अपने बचे...
तुम बारिश की तरह आईं और एकबारगी तेज झिपार से प्रेम से सराबोर कर गईं मैं भींगता रहा-- भींगता रहा...
तुम्हारे 'हिज्र का सदमा बड़ा 'निराला है। ग़म - ए- जहाँ 'से इसी ने हमें 'निकाला है। उसी के नूर...