इन दिनों मैं
इन दिनों मैं- जुगनू हो गया हूं ढूंढ़ता फिरता हूं उम्मीदों के दीप जो रोशन कर सकें तुम्हारी नाउम्मीदियों को।...
इन दिनों मैं- जुगनू हो गया हूं ढूंढ़ता फिरता हूं उम्मीदों के दीप जो रोशन कर सकें तुम्हारी नाउम्मीदियों को।...
तू गुनाहों का देवता मैं पीली छतरी वाली लड़की तू जैसे राम निराला का मैं श्रद्धा प्रसाद के मन की...
रश्क होता है! प्रकृति से मुझे रश्क होता है! कभी-कभी जब देखती हूं, आसमान के रंगों को तब। महसूस होता...
अजीब सी चुप्पी तो है पर इशारा करती है छुपा है कोई तूफान वक्त के सीने में उखाड़ फेंकने को...
"देश की बेटी" मुझमें जुनून है, हिम्मत है,हौसला है। ऐसी कोई डोर नहीं, रोके जो पतवार को। मैं बढ़ चली,...
आँखों की नमीं बहुत कुछ बयाँ करती है आँखों की नमीं ये तो पढ़ने वाले ही समझते है इसकी गहराई...
-सरला माहेश्वरी बाबा मैंने सपना देखा ! घर में बैठे पास हमारे खिलखिला रहे हो तुम ! सत्य को लकवा...
गज़ल 1 छोड़ आए वो हसीं घर याद आता है कि जैसे क़ैद में पंछी को अंबर याद आता है...
कुछ पल के लिए और जी लेता मैं बैठ कर बातें करते गुज़रे हुए वक़्त का स्वप्ने भी देखते साथ...
पत्तों ने पूछा धरा से । दादी, तुमने पिता वृक्ष को जन्म दिया । पिता वृक्ष ने हमें जन्म दिया...