April 23, 2026

कविता

युद्ध सिर्फ़ सरहदों पर नहीं होते

ज़मीन को चाहे किसी भी पैमाने से माप लो उसका बँटवारा कभी नहीं होता सम-तुल्य। कहीं मौसम रंग बदल लेंगे,...

जनकवि कोदूराम “दलित” जी की हिन्दी कविता –

"गरीबी, तू न यहाँ से जा" गरीबी ! तू न यहाँ से जा एक बात मेरी सुन पगली, बैठ यहाँ...

तुम भी रखना पाँव मेरे गाँव –

सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' क्वीन्स, न्यूयार्क के पुस्तकालय में वह मुस्कराते पढ़ रही थी और मैं पूछता कि पत्रिका मेरी...

घुटने का दर्द : पाँच कविताएँ

चाँदनी रात में घुटने की चरमराहट पहाड़ की सैर का सपना खामोशी में गूँजता है। हर क़दम पर जैसे पुरानी...