युद्ध सिर्फ़ सरहदों पर नहीं होते
ज़मीन को चाहे किसी भी पैमाने से माप लो उसका बँटवारा कभी नहीं होता सम-तुल्य। कहीं मौसम रंग बदल लेंगे,...
ज़मीन को चाहे किसी भी पैमाने से माप लो उसका बँटवारा कभी नहीं होता सम-तुल्य। कहीं मौसम रंग बदल लेंगे,...
आज सुबह मैं चौंक गया जब सामने अलमारी में रखी किताबें धीमे-धीमे मुस्कुराने लगीं। कइयों ने तो अपने नन्हे-नन्हें हाथ...
"गरीबी, तू न यहाँ से जा" गरीबी ! तू न यहाँ से जा एक बात मेरी सुन पगली, बैठ यहाँ...
ज़ियादा की ख़्वाहिश कब की हमने,,, मगर तुम्हें या तुमसे इतना भी यदि नहीं माँगेंगे तो जीयेंगे कैसे,,, हमारे बालों...
सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' क्वीन्स, न्यूयार्क के पुस्तकालय में वह मुस्कराते पढ़ रही थी और मैं पूछता कि पत्रिका मेरी...
मर्द भी मासूम होते हैं चेहरा सख़्त, दिल कोमल। हँसी झूठी, आँखें गीली। बोझ भारी, कंधे थके। रातें लंबी, सपने...
तनहाई की गहराई में , डूब रहा हूँ शोर के इस जहाँ में ,अब उब रहा हूँ। हर तरफ मची...
(जयप्रकाश मानस की कविता ) हमारा संबंध कोई रोग नहीं पर तुम्हारी याद का एक लक्षण है जो मेरी नाड़ी...
आज ही के दिन अमृता प्रीतम की जन्म शताब्दी वर्ष पर 'डायलॉग' में पढ़ी गई एक कविता- ______ तुम आना...
चाँदनी रात में घुटने की चरमराहट पहाड़ की सैर का सपना खामोशी में गूँजता है। हर क़दम पर जैसे पुरानी...