अभिनय में मैं धर्मेंद्र का फ़ैन नहीं रहा…
उनसे दो बार मिलना हुआ। एक बार 1980 में जयपुर के क्लार्क्स आमेर होटल में, जब वे — हेमा मालिनी...
उनसे दो बार मिलना हुआ। एक बार 1980 में जयपुर के क्लार्क्स आमेर होटल में, जब वे — हेमा मालिनी...
वे मेरे मिडिल स्कूल के प्यारे प्यारे दिन थे. जब फिल्मों के धर्मेन्द्र से अंजान था. तब तक शम्मीकपूर और...
कायदे से तो आज का दिन राष्ट्रीय शोक दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए। क्योंकि आज ही के दिन...
न महलों की बुलंदी से न लफ़्ज़ों के नगीने से। तमद्दुन में निखार आता है घीसू के पसीने से। कि...
एक ने पूछा महाराज ! क्या खाते .कब खाते हो कितना खाते हो। मैंने कहा सब कुछ पर बहुत कम-...
मातृभाषा वह धूप है, जो घर की देहरी पर कभी नहीं पड़ती - क्योंकि वह स्वयं ही घर के भीतर...
कभी-कभी मुझे लगता है : महानता एक छोटा-सा महाद्वीप है—अभी-अभी खोजा गया, पर जिस पर झंडे बहुत पहले से गड़े...
जयप्रकाश मानस हस्ती चढ़िए ज्ञान कौ, सहज दुलीचा डारि स्वान रूप संसार है, भूँकन दे झक मारि ।
पाठ - तेरह लेखिका – जया जादवानी सेतु प्रकाशन ( २०२१ ) प्रथम संस्करण ------------------------------- यह सिर्फ एक पाठकीय प्रतिक्रिया...
वारे मोर पंडकी मैना, तोर कजरेरी नैना मिरगिन कस रेंगना तोर नैना मारे वो चोखी बान, हाय रे तोर नैना...