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ग़ज़ल
छोड़ दे सीधा-सादा रहना, हुश्यारी भी सीख ज़रा, दुनिया में जीना है तो दुनियादारी भी सीख ज़रा। आख़िर कब तक...
ग़ज़ल
मैंने तुझे ज़मीं से फ़लक तक उठा दिया तूने नज़र से भी मुझे अपनी गिरा दिया बदनाम हो न जाए...
इज़हार…
बंधे हुए जिंदगी के वो किरदार हो तुम, जो मेरे भावी भाग्य में समा न सके । उलझे हुए आशिक़ी...
मनोज शाह ‘मानस’ की तीन ग़ज़लें
"कब तक इन बेड़ियों में..." सजती नहीं है दुल्हन अब डोलियों में । अब वो दम नहीं शिकारियों के गोलियों...
“दूसर पुण्यतिथि मा विनम्र श्रद्धांजलि”
सुरता - श्री रघुवीर अग्रवाल "पथिक" पथिक जी के जनम जन्म 4 अगस्त 1937 के ग्राम मोहबट्टा मा होइस। इनकर...
प्रथम चाक कविता सम्मान शिवप्रसाद जोशी को
मुजफ्फरनगर। 2021 का श्री सोहनवीर सिंह प्रजापति स्मृति ‘चाक कविता सम्मान’ कवि श्री शिवप्रसाद जोशी को दिये जाने की घोषणा...
‘ताई’ तुम भी चली गई
इस समय तो तुम्हारी बहुत ज़रूरत थी तुम्हारे हौसले की ज़िंदा मिसाल की तपिश हमारी कमज़ोरियों को ताक़त में बदलती...
स्मृति वन
दूर क्षितिज में ढ़लता सूरज,तम के गहरे साये। कल प्राची में रंग भरेगा,मन में रख आशायें। अलसाई सी धूप आज...
” नव वर्ष की आहट…”
वो गुजर गई दिसंबर की तरह , मैं ठहर गया जनवरी की तरह । फासले तो इतने भी न थे...