इज़हार…
बंधे हुए जिंदगी के वो किरदार हो तुम, जो मेरे भावी भाग्य में समा न सके । उलझे हुए आशिक़ी...
बंधे हुए जिंदगी के वो किरदार हो तुम, जो मेरे भावी भाग्य में समा न सके । उलझे हुए आशिक़ी...
"कब तक इन बेड़ियों में..." सजती नहीं है दुल्हन अब डोलियों में । अब वो दम नहीं शिकारियों के गोलियों...
सुरता - श्री रघुवीर अग्रवाल "पथिक" पथिक जी के जनम जन्म 4 अगस्त 1937 के ग्राम मोहबट्टा मा होइस। इनकर...
मुजफ्फरनगर। 2021 का श्री सोहनवीर सिंह प्रजापति स्मृति ‘चाक कविता सम्मान’ कवि श्री शिवप्रसाद जोशी को दिये जाने की घोषणा...
इस समय तो तुम्हारी बहुत ज़रूरत थी तुम्हारे हौसले की ज़िंदा मिसाल की तपिश हमारी कमज़ोरियों को ताक़त में बदलती...
दूर क्षितिज में ढ़लता सूरज,तम के गहरे साये। कल प्राची में रंग भरेगा,मन में रख आशायें। अलसाई सी धूप आज...
वो गुजर गई दिसंबर की तरह , मैं ठहर गया जनवरी की तरह । फासले तो इतने भी न थे...
खुदगजॅ जमाने में खुदगजॅ जमाने में दीवाने हजारों हैं मरने के लिए देखो परवाने हजारों हैं। करते हैं खुद खुशी...
बहर - बहरे रमल मुसम्मन महज़ूफ़ अर्कान - फ़ाइलातुन् फ़ाइलातुन् फ़ाइलातुन् फ़ाइलुन् वज़्न - 2122 2122 2122 212 🌹 ग़ज़ल🌹...