सुप्रिया शर्मा की तीन कविताएं
दुविधा विधा है दुविधा की, हम ख़फा है दुविधा से। मन न हो परेशान दुविधा से। ये तो विधा है...
दुविधा विधा है दुविधा की, हम ख़फा है दुविधा से। मन न हो परेशान दुविधा से। ये तो विधा है...
नवा राज बन के बेरा मे, भारी गदगदाए रहे महराज अब कइसे मुंह चोराए कस रेंगत हस-सुखरा के ताना मंथिर...
सबको बहुत लुभाया करतीं सबका मन हरसाया करतीं सब पर प्रेम लुटाया करतीं प्यारी - प्यारी चिड़ियां कुटिया, बंगला, मंदिर,...
डॉ. शुभ्रता मिश्रा वास्को-द-गामा, गोवा shubhrataravi@gmail.com मोबाइल 8975245042 इस साल संयुक्त राष्ट्र ने 5 जून 2021 को मनाए जा रहे...
हाँ..मैं भी कह देती अपने दिल की बात जो तुम सुन लेते तो अच्छा होता जुबा़ से कह नहीं पाऊँगी...
मीलों मील अकेले चलना अपना दीपक बनकर जलना सूरज की तो फ़ितरत है ये नित्य नया हो, उगना ढलना बुझे...
माँ- बाप का इकलौता बेटा था गगन। माँ की आँखों का तारा था वह, और पिताजी के दिल की धडकन...
अरे खटारा साइकिल, निच्चट गए बुढ़ाय। बेचे बर ले जाव तो, कोन्हों नहीं बिसाय।। कोन्हों नहीं बिसाय, खियागें सब पुरजा...
बात धर्म की आते ही कट्टर हो जाते हैं अच्छे-अच्छे इंसां भी पत्थर हो जाते हैं कैसी पूजा और इबादत...
कोरोना, दूर भगाना है जाग उठो, अब जाग उठो, हम सबकी जान बचाना है, इस कोरोना महामारी से , भारत...