लघुकथा-चौथा बंदर
सन् 1947 के आसपास की बात है, गांधी जी के तीन बंदर देखकर लोग पूछने लगे थे- अभी तक ये...
सन् 1947 के आसपास की बात है, गांधी जी के तीन बंदर देखकर लोग पूछने लगे थे- अभी तक ये...
असग़र वजाहत देश की सभी बड़ी-बड़ी संस्थाओं ने एक राय होकर यह फैसला कर लिया कि बूढ़े लोग देश और...
—— सुशांत सुप्रिय लोग आपने-सामने की सीटों पर ऐसे बैठे थे जैसे खेत की क्यारियों में उगी हुई गोभियाँ हों...
शाम का समय था, थिरु अपने घर की ओर जा रही थी।दरअसल वह किसानों के घर काम करने जाती और...
एक थी गुलख़ोर चिड़िया। उसने दूसरी चिड़ियाओं पर तंज़ कसते हुए कहा," तुम सब नाहक पेट के लिए इतना मशक्कत...
माँ- बाप का इकलौता बेटा था गगन। माँ की आँखों का तारा था वह, और पिताजी के दिल की धडकन...
अरे खटारा साइकिल, निच्चट गए बुढ़ाय। बेचे बर ले जाव तो, कोन्हों नहीं बिसाय।। कोन्हों नहीं बिसाय, खियागें सब पुरजा...
-रामराव वामनकर ''अरे प्रतीक तुम कब आये बेटा ? पिता ने अपने कमरे से बैठक में कदम रखते हुए पूछा...
वह दूर से दिख रहा मोड़ ही था। कच्चे रास्ते से लगभग दो किलोमीटर की दूरी पर। पीला मरियल सा...
श्रीलाल शुक्ल माघ की रात। तालाब का किनारा। सूखता हुआ पानी। सड़ती हुई काई। कोहरे में सब कुछ ढँका हुआ।...