October 22, 2026

कविता

जनकवि कोदूराम “दलित” जी की हिन्दी कविता –

"गरीबी, तू न यहाँ से जा" गरीबी ! तू न यहाँ से जा एक बात मेरी सुन पगली, बैठ यहाँ...

तुम भी रखना पाँव मेरे गाँव –

सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक' क्वीन्स, न्यूयार्क के पुस्तकालय में वह मुस्कराते पढ़ रही थी और मैं पूछता कि पत्रिका मेरी...

घुटने का दर्द : पाँच कविताएँ

चाँदनी रात में घुटने की चरमराहट पहाड़ की सैर का सपना खामोशी में गूँजता है। हर क़दम पर जैसे पुरानी...

बाढ़ बहुत है, मिलजुलकर ही नदी पार करना होगा…

बाढ़ बहुत है, मिलजुलकर ही नदी पार करना होगा आने वाले हर खतरे पर हमें वार करना होगा दूर तलक...

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