बूढ़ी होती स्त्री…
बूढ़ी होती स्त्री… जिसके सिर पर कभी यह घर टिका था, आज उसी घर की दीवारों से सिर टिकाकर सपनों...
बूढ़ी होती स्त्री… जिसके सिर पर कभी यह घर टिका था, आज उसी घर की दीवारों से सिर टिकाकर सपनों...
हृदय विकल उठता ज़ब अल्हड़ मेघों की नाद से सहज नयन भर आते हैं तब प्रियवर की याद से सुनो...
सच,आसान नहीं होता है एक शादीशुदा आदमी से इश्क़ करना। क्योंकि इश्क़ सिर्फ़ उस आदमी से नहीं होगा, तुम्हें प्यार...
स्त्रियों, सहेजना उन पुरुषों को, जिन्होंने प्रेम किया, पर नहीं लिखा अपने साथ, दीवारों पर तुम्हारा नाम, जिन्होंने प्रेम की...
प्रतिभाशील स्त्रियों ने स्वयं को निपुण किया चौसठ कलाओं में, उनका प्रबंधन श्रेष्ठ था इतना कि कार्यालय में डाटा एनालिसिस...
चादर ओढ़े धूप को चिंदी-चिंदी आग। मौसम फूंफूं कर रहा, जैसे काला नाग॥ चिरई-चुनमुन लापता, मौसम की अंधेर। लगी सुलगने...
लौट आओ आँसुओं वापस आँखों में अब समंदर में भी और जगह नहीं है खारेपन के लिये पहाड़ों ने भी...
मैंने कब कहा कोई मेरे साथ चले चाहा जरुर! अक्सर दरख़्तों के लिए जूते सिलवा लाया और उनके पास खड़ा...
कविता रोज लिखते हैं मन में आए इतना लिखते हैं लेकिन क्या सच में हम कविता लिखते हैं। बहुत दिनों...
जीवन के सफर मे पक्के, चमचमाते रास्ते कम ही मिलते है ! अक्सर मिलती है अजनबी पगडंडियाँ उबड़- खाबड़ सी.....