मापनी : 221 1222 221 1222
आकर मेरी बाहों में जज़्बात मचलने दो उल्फ़त के खिलें है गुल एहसास महकने दो।-1 हर-सम्त फ़ज़ाॅं महकी इक नूर...
आकर मेरी बाहों में जज़्बात मचलने दो उल्फ़त के खिलें है गुल एहसास महकने दो।-1 हर-सम्त फ़ज़ाॅं महकी इक नूर...
मैंने पीड़ा को रोपा और बहुत ध्यान से देखा उसे बढ़ते हुए जब देखा , तो लगा मेरे सबसे करीब...
(सुख दुख की कविताएँ ) दुख का सीधा मुकाबला सुख से था सुख के पक्ष में सत्ता थी मक्कारी थी...
है शरद ऋतु का आगमन , फूलों की छटा है मनभावन।। नर्म धूप तन-मन को भाये, जैसे हो कोई अपनापन।।...
शरीर मंदिर नहीं है कि धो धोकर इसे रखूँ पवित्र अपरस में रखूँ कोई छू न सके मुझे शरीर किसी...
अधूरेपन के बीच से चला जाऊँगा अपूर्ण कविता की तरह रह जाना चाहता हूँ उसकी संभावना में मुरझाने से पहले...
छोड़ बाबुल तुम्हें दूर कैसे रहें। दूर -रहने का गम हम कैसे सहें।। खूब बचपन में उछली व कूदी जहाँ।...
इक दिन हम सब लोग, मिलेंगे मिट्टी में । लेकिन मिलकर हमीं, खिलेंगे मिट्टी में ।। मिट्टी है अनमोल, इसे...
मैं लिखना चाहता हूँ एक अच्छी प्रेम कविता पर आड़े आ जाता है तुम्हारा प्रेम तुम्हारा प्रेम यानी कि जो...
सब उम्मीदें टूट गई तो आशाऐं भी रूठ गई तो दुख ने आकर घेर लिया था सबने ही मुँह फेर...