नौकरी मे यूँ हुआ अक्सर
नौकरी मे यूँ हुआ अक्सर जोकरों को भी कहा सर सर। चार मिसरे जो न लिख पाए मंच पर बैठे...
नौकरी मे यूँ हुआ अक्सर जोकरों को भी कहा सर सर। चार मिसरे जो न लिख पाए मंच पर बैठे...
न दैरो हरम का पता चाहती हूँ ये रब जानता है मैं क्या चाहती हूँ के दम घुट रहा है...
मान बढ़ा भी सकते हैं हम मान घटा भी सकते हैं,, आंच पड़ी स्वाभिमान पे तो तलवार चला भी सकते...
तुम यादों के अतल गर्म में,मैं धरती पर रहती हूॅं। मौन तुम्हारा मुखरित करने,मैं शब्दों से गहती हूॅं। दुःख के...
कई मित्र स्त्रियां मेहरबान हैं दे रही हैं बधाई हम पुरुषों को बता रही हैं पुरुष दिवस है आज! वैसे...
एक तस्वीर बन के रहते हैं अब न जीते हैं और न मरते हैं पाक दामन रहे हमेशा हम हम...
दुनिया हसीन लगती है जिसके जमाल से, कैसे निगाह फेर लूँ उसके ख़याल से । आलम था गर्दिशों का सियाही...
ख़ुदेजा ख़ान जी को जन्मदिन की बधाई । प्रस्तुत है उनकी पांच कविताएँ । आप सक्रिय साथी हैं । संवेदना...
चित्रांकन :- डा. सुनीता वर्मा। झूले में दीदी-भइया आओ ना मम्मी-पापा आओ ना मैं बैठी हूं झूले में आकर जरा...
मांतगे हे धनहा म धान बड़ मगन हे किसान उत्ती ले सुरूज हा लावत हे बिहान बबा हा मुसुर मुसुर...